क्या CEC ज्ञानेश गुप्ता भारत के नागरिक हैं : TMC नेता साकेत गोखले

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नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश गुप्ता के मतदाता रिकॉर्ड को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। TMC नेता साकेत गोखले ने दावा किया कि दिल्ली की मौजूदा मतदाता सूची में ज्ञानेश गुप्ता का नाम दर्ज है, लेकिन पिछली SIR (Special Intensive Revision) सूचियों में उनके नाम का कोई रिकॉर्ड नहीं मिलता।

चुनाव आयोग के सूत्रों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए सफाई दी है कि ज्ञानेश गुप्ता का नाम पिछली SIR सूची में उनके पिता के नाम के आधार पर मैप किया गया था। आयोग की ओर से इसे किसी तरह की मतदाता सूची संबंधी विसंगति नहीं बताया गया है।

लेकिन सवाल यह है कि क्या वाकई मामला इतना साधारण है, या इसके पीछे कुछ और भी है? आइए, पूरे विवाद को तथ्यों के साथ समझते हैं।

घटनाक्रम: क्या हुआ 21 सितंबर को?

21 सितंबर 2026 को TMC के पूर्व राज्यसभा सांसद साकेत गोखले ने X (ट्विटर) पर एक लंबी पोस्ट लिखी, जिसमें उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश गुप्ता के वोटर रिकॉर्ड पर सीधे सवाल उठाए।

गोखले ने लिखा: “क्या CEC ज्ञानेश गुप्ता भारत के नागरिक हैं?”

उनका दावा था कि दिल्ली की ड्राफ्ट SIR वोटर लिस्ट में ज्ञानेश गुप्ता का नाम “ज्ञानेश गुप्ता, पुत्र सुबोध गुप्ता” के तौर पर दर्ज है। लेकिन जब उन्होंने 2002-03 की पिछली SIR सूचियों में उत्तर प्रदेश, केरल और दिल्ली में इस नाम को खोजा, तो कहीं नहीं मिला।

SIR प्रक्रिया क्या है? और ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ क्यों अहम है?

Special Intensive Revision (SIR) मतदाता सूची का विशेष गहन संशोधन है, जो 2002-03 के बाद पहली बार बड़े पैमाने पर चल रहा है।

इस प्रक्रिया में:

पुरानी 2002-03 SIR रोल से नई एंट्रीज को मैप किया जाता है।

अगर कोई नाम पुरानी रोल से मैच नहीं होता, तो उसे “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” या “अनमैप्ड वोटर” फ्लैग किया जाता है।

ऐसे वोटरों को नोटिस जारी किया जाता है कि वे अपने दस्तावेज जमा करें।

दिल्ली में 97 लाख वोटरों की ड्राफ्ट रोल जारी हुई है, और 33.13 लाख वोटरों को डिस्क्रेपेंसी के नोटिस मिले हैं।

गोखले का सवाल था: अगर ज्ञानेश गुप्ता का नाम पिछली SIR में नहीं है, तो उन्हें भी नोटिस मिलना चाहिए था।

ज्ञानेश गुप्ता की पृष्ठभूमि: UP, केरल, दिल्ली

जन्म: उत्तर प्रदेश में

IAS कैडर: केरल (1993 बैच)

पोस्टिंग: दिल्ली में विभिन्न पदों पर रहे, वर्तमान में CEC

पिता का नाम: सुबोध गुप्ता

गोखले ने तर्क दिया: “ज्ञानेश गुप्ता UP में पैदा हुए, केरल कैडर के IAS अधिकारी हैं, और दिल्ली में पोस्टेड रहे। मैंने तीनों राज्यों की 2002-03 SIR में ‘ज्ञानेश गुप्ता, पुत्र सुबोध गुप्ता’ खोजा — कहीं नहीं मिला।”

चुनाव आयोग की सफाई: क्या कहा सूत्रों ने?

22 सितंबर को EC सूत्रों ने मीडिया को बताया:

पिता के नाम पर मैपिंग: ज्ञानेश गुप्ता का नाम उनके पिता सुबोध गुप्ता के नाम से जोड़कर पिछली SIR में मैप किया गया था।

पिता उत्तर प्रदेश में: सुबोध गुप्ता उत्तर प्रदेश की वोटर लिस्ट में दर्ज हैं, इसलिए बेटे का नाम वहां से मैप हुआ।

कोई विसंगति नहीं: यह सामान्य प्रक्रिया है, कोई अनियमितता नहीं।

लेकिन आधिकारिक प्रेस रिलीज या बयान 24 सितंबर तक सामने नहीं आया था।

साकेत गोखले के 4 सवाल चुनाव आयोग से

गोखले ने X पोस्ट में चुनाव आयोग से 4 सवाल पूछे:

किस राज्य की पिछली SIR रोल में CEC ज्ञानेश गुप्ता मैप किए गए हैं?

क्या वे 2002-03 में रजिस्टर्ड वोटर थे?

अगर तीनों राज्यों की पिछली SIR में नाम नहीं है, तो मौजूदा वोटर लिस्ट में नाम कैसे आया?

क्या उन्हें “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” या “अनमैप्ड वोटर” का नोटिस मिला?

गोखले ने लिखा: “देश को जानना चाहिए।”

विपक्ष का हमला: CEC पर उठे सवाल सिर्फ वोटर रिकॉर्ड तक सीमित नहीं

यह विवाद तब आया जब The Indian Express ने 23 सितंबर को रिपोर्ट किया कि दो इलेक्शन कमिश्नर — सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी — ने SIR और वोटर डिलीशन पर 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज की थी।

इन आपत्तियों में शामिल थे:

Form 6 में बदलाव: नए वोटरों के फॉर्म में एक सवाल जोड़ा गया कि क्या उनका नाम पिछली SIR में है। दोनों कमिश्नरों ने इसे “अनअथराइज्ड और अवैध” कहा।

वोटर डेटाबेस का सेंट्रलाइजेशन: राज्य के EROs का एक्सेस कम किया गया, डेटाबेस का कंट्रोल दिल्ली में केंद्रित हुआ।

पश्चिम बंगाल में अपील्स: जिन वोटरों को ज्यूडिशियल ऑफिसर्स ने बहाल किया, उनके खिलाफ ECI ने अपीलें दाखिल कीं — बिना दोनों कमिश्नरों की जानकारी के।

गोवा में 97 वोटर वंचित: सॉफ्टवेयर में खामी के कारण 97 पात्र वोटर फाइनल लिस्ट से छूट गए, हालांकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें बहाल किया जाना चाहिए था।

इस पृष्ठभूमि में विपक्षी पार्टियों ने CEC पर हमला तेज कर दिया:

ममता बनर्जी (TMC): CEC की गिरफ्तारी की मांग, SIR रद्द करने की मांग

कांग्रेस, AAP, SP, CPI(M), PDP: CEC को हटाने और जांच की मांग

सुप्रीम कोर्ट में याचिका: एक वकील ने CEC के खिलाफ अवमानना कार्यवाही की मांग की।

रिपोर्ट : इस्मा टाइम्स न्यूज़ डेस्क.

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