जिला विधिज्ञ संघ में ‘विटनेस प्रोटेक्शन: लीगल क्राइसिस ऑफ इंडिया’ विषय पर हुई चर्चा
औरंगाबाद, बिहार: जिला विधिज्ञ संघ, औरंगाबाद में युवा अधिवक्ताओं की पहल पर ‘विटनेस प्रोटेक्शन: लीगल क्राइसिस ऑफ इंडिया’ विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला विधिज्ञ संघ के अध्यक्ष विजय कुमार पाण्डेय ने की, जबकि मंच संचालन कुणाल रंजन एवं प्रभात बांधुल्य ने किया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला विधिज्ञ संघ के पूर्व अध्यक्ष रसिक बिहारी सिंह, पूर्व सचिव नागेंद्र सिंह, एपीपी महेंद्र प्रसाद सिंह, वरीय अधिवक्ता योगेंद्र प्रसाद योगी, अकमल हसन, एपीपी कामता प्रसाद सिंह तथा चंद्रशेखर सिंह देव मौजूद रहे।
दिवंगत अधिवक्ता प्रभात कुमार राय को दी श्रद्धांजलि
सेमिनार की शुरुआत दिवंगत वरीय अधिवक्ता प्रभात कुमार राय के तैलचित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई। उपस्थित अधिवक्ताओं एवं अतिथियों ने उनके व्यक्तित्व और विधि क्षेत्र में योगदान को याद किया। इसके बाद दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद सेमिनार के मुख्य विषय पर चर्चा और परिचर्चा शुरू हुई। वक्ताओं ने न्यायिक प्रक्रिया में गवाहों की भूमिका तथा उनकी सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे।
गवाहों की सुरक्षा को न्याय व्यवस्था का अहम हिस्सा बताया
अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही ने बताया कि सेमिनार में वक्ताओं ने कहा कि किसी भी आपराधिक मामले में गवाह न्याय व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। गवाहों के प्रभावित होने या उनके बयान से मुकरने की स्थिति में मुकदमे की पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
वक्ताओं ने कहा कि गवाहों को भय, दबाव या किसी अन्य प्रभाव से मुक्त होकर बयान देने का अवसर मिलना न्याय की निष्पक्षता के लिए जरूरी है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए गवाह संरक्षण से जुड़े प्रावधानों और न्यायिक पहलों पर लगातार जोर दिया गया है।
सेमिनार में गवाह संरक्षण योजना-2018 तथा नए आपराधिक कानूनों का भी उल्लेख किया गया। वक्ताओं ने बताया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 398 में गवाहों के संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है।
वक्ताओं के अनुसार, राज्यों को गवाहों की सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि कोई भी व्यक्ति भय या दबाव के कारण सत्य बयान देने से पीछे न हटे। स्वतंत्र रूप से गवाही देने को व्यक्ति के संवैधानिक अधिकारों से भी जोड़कर देखा गया।
विशेष रूप से बाल गवाहों, अशिक्षित व्यक्तियों, महिलाओं तथा अन्य संवेदनशील गवाहों की सुरक्षा के लिए उपलब्ध कानूनी प्रावधानों पर भी चर्चा की गई।
कार्यक्रम में एपीपी देवी नंदन सिंह, राज नंदन प्रसाद, पूर्व लोक अभियोजक प्रमोद कुमार सिंह, विधि परामर्शी शेखर कुमार, नीरज कुमार सिंह, क्षितिज रंजन, अभिनंदन कुमार, रोशन कुमार, प्रयाग सिंह सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता एवं अन्य अतिथि उपस्थित रहे।
रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय.
