गया के कोच में 80 वर्षों से हो रही मां दुर्गा की पूजा, आजादी की मन्नत से जुड़ी है ऐतिहासिक मान्यता

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गया, बिहार, 19 अक्टूबर 2026: बिहार के गया जिले के टिकारी अनुमंडल अंतर्गत कोच गांव में मां दुर्गा की आराधना का इतिहास करीब 80 वर्षों पुराना है। यहां की दुर्गा पूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों की आस्था, श्रद्धा और एक ऐतिहासिक मान्यता से भी जुड़ी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार, देश की आजादी के लिए कोच के निवासियों ने मां दुर्गा की आराधना करते हुए मन्नत मांगी थी। लोगों का विश्वास है कि उनकी मन्नत पूरी हुई और देश आजाद हुआ। इसी मान्यता के कारण यह पूजा स्थल आज भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है।

स्थानीय निवासी कृष्ण गोपालन ने मीडिया से बातचीत में बताया कि वर्ष 1946 में दुर्गा पूजा समिति, कोच की स्थापना की गई थी। तब से हर साल यहां मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है।

1946 में हुई थी दुर्गा पूजा समिति की स्थापना

कृष्ण गोपालन के मुताबिक, कोच गांव में दुर्गा पूजा की परंपरा कई दशकों से चली आ रही है। प्रत्येक वर्ष पूजा समिति के सदस्य, ग्रामीण और श्रद्धालु मिलकर मां दुर्गा की आराधना करते हैं। इस दौरान पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बना रहता है और लोग उत्साह के साथ धार्मिक आयोजन में भाग लेते हैं।

उन्होंने बताया कि देश की आजादी से जुड़ी स्थानीय मान्यता इस पूजा स्थल को विशेष पहचान देती है। ग्रामीणों की आस्था है कि संकट के समय मां दुर्गा की आराधना से उन्हें हौसला और संबल मिलता है।

संकट के समय मां दुर्गा पर अटूट विश्वास

कृष्ण गोपालन ने कहा कि जब-जब देश या गांव पर संकट के बादल मंडराए, तब लोगों ने मां दुर्गा से प्रार्थना की। उनका विश्वास है कि मां की कृपा से कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है।

उन्होंने बताया कि करीब 80 वर्षों से इस स्थान पर श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार, यहां सच्चे मन से मन्नत मांगने वाले भक्त मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं। इसी आस्था के चलते दूर-दूर से लोग माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व मंत्री ने भी किए दर्शन

इस वर्ष आयोजित दुर्गा पूजा के दौरान बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार, बिहार सरकार के पूर्व मंत्री डॉ. अनिल कुमार और टिकारी अनुमंडल पदाधिकारी प्रवीण कुंदन भी पूजा स्थल पर पहुंचे। कृष्ण गोपालन के अनुसार, इन लोगों ने मां दुर्गा के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

प्रमुख लोगों के आगमन से पूजा समिति के सदस्यों और स्थानीय श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिला। पूजा के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और धार्मिक कार्यक्रमों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

स्वामी वेंकटेश प्रपन्नाचार्य महाराज कर रहे श्रीराम कथा

दुर्गा पूजा के अवसर पर कोच में स्वामी वेंकटेश प्रपन्नाचार्य महाराज के सान्निध्य में श्रीराम कथा का आयोजन भी किया जा रहा है। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में भक्त और श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

श्रीराम कथा के आयोजन से क्षेत्र में धार्मिक वातावरण बना हुआ है। श्रद्धालु मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के साथ-साथ कथा श्रवण कर रहे हैं।

पूजा समिति के सदस्यों की अहम भूमिका

कृष्ण गोपालन ने दुर्गा पूजा के सफल आयोजन में समिति के सक्रिय सदस्यों के योगदान की सराहना की। उन्होंने बताया कि विदेशी कुमार, रंगनाथ कुमार, मुकेश कुमार, सोनू कुमार, गोविंद कुमार, जंतु जी और रौशन कुमार सहित अन्य सदस्य आयोजन की व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

स्थानीय लोगों के सहयोग से पूजा और धार्मिक कार्यक्रमों का संचालन किया जा रहा है। आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, भक्तों और श्रद्धालुओं की भागीदारी देखने को मिल रही है।

कोच की दुर्गा पूजा आज भी गांव की धार्मिक परंपरा, सामूहिक एकजुटता और लोगों की अटूट आस्था का प्रतीक बनी हुई है। करीब आठ दशकों से चली आ रही यह परंपरा नई पीढ़ी को भी अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ रही है।

रिपोर्ट : विश्वनाथ आनंद.

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