औरंगाबाद (बिहार) : जिला परिषद सदस्य, क्षेत्र संख्या-06 (गोह) श्रीमती शोभा कुमारी के प्रतिनिधि श्याम सुंदर ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बिहार बंद के दौरान हुई हिंसा की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में कई लोग घायल हुए हैं, जिनमें समाचार कवरेज कर रहे एक दैनिक अखबार के पत्रकार, पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर प्रदर्शनकारियों को हिंसा के लिए उकसाने वाला कौन था? इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कब होगी और जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है, उनकी जवाबदेही कौन तय करेगा?
श्याम सुंदर ने कहा कि जानकारी के अनुसार छात्र शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे थे। लेकिन रमेश चौक पर बैरिकेडिंग कर उन्हें आगे बढ़ने से क्यों रोका गया? उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन करने पर भी पुलिस का पहरा रहेगा?
उन्होंने जिला प्रशासन से यह भी पूछा कि जिस नीट पेपर लीक के मुद्दे को लेकर देशभर में छात्रों का आंदोलन चल रहा था, क्या वह पूरी तरह गलत था? अगर ऐसा था, तो फिर केंद्र सरकार ने आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने का आश्वासन क्यों दिया?
उन्होंने कहा कि औरंगाबाद भी भारत का ही हिस्सा है। ऐसे में यहां के छात्रों के साथ अलग व्यवहार क्यों किया गया? उनका कहना है कि सामने आए वीडियो में पुलिसकर्मियों के कंधों पर हथियार और हाथों में लाठियां दिखाई दे रही हैं, जबकि छात्राएं और अन्य प्रदर्शनकारी महिला पुलिसकर्मियों को गुलाब का फूल भेंट करते नजर आ रहे हैं। ऐसे में निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर हिंसा भड़काने का एकतरफा आरोप लगाना उचित नहीं कहा जा सकता।
श्याम सुंदर ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जिला प्रशासन छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस नहीं लेता है, तो यह मामला न्यायालय के साथ-साथ मानवाधिकार आयोग तक भी ले जाया जाएगा।
उन्होंने मांग की कि छात्रों की गिरफ्तारी पर तत्काल रोक लगाई जाए और 72 घंटे के भीतर सभी मुकदमे वापस लिए जाएं। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ, तो छात्र हितों की रक्षा के लिए लोग लोकतांत्रिक तरीके से सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होंगे।
रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय.
