नई दिल्ली: कांग्रेस ने 26 नवंबर को संविधान दिवस के मौके पर दिल्ली में ‘संविधान बचाओ मार्च’ निकालने का ऐलान किया है। इस मार्च में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत पार्टी के सभी सांसद शामिल होंगे। इसके अलावा विपक्षी दलों के सांसदों को भी मार्च में शामिल करने की कोशिश की जा रही है।
कांग्रेस इस कार्यक्रम के जरिए संविधान, लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को उठाने की तैयारी में है। पार्टी का कहना है कि देश में संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए आवाज उठाना जरूरी है।
छह जगहों से दिल्ली पहुंचेंगी कांग्रेस की रैलियां
कांग्रेस ने 25 और 26 नवंबर को उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के आसपास के छह स्थानों से बड़ी रैलियां निकालने की योजना बनाई है। इन रैलियों को दिल्ली में एक जगह इकट्ठा किया जाएगा, जहां बड़े स्तर पर प्रदर्शन होगा।
इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण 26 नवंबर को निकाला जाने वाला ‘संविधान बचाओ मार्च’ होगा, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और सांसदों के शामिल होने की तैयारी है।
गौरतलब है कि संविधान दिवस हर साल 26 नवंबर को मनाया जाता है। इसी दिन 1949 में संविधान सभा ने भारत के संविधान को अपनाया था। इसलिए संविधान दिवस की सही तारीख 26 नवंबर है, न कि 25 नवंबर।
अमित शाह के तीन करोड़ घुसपैठियों वाले दावे पर भी विवाद
इस बीच कांग्रेस ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के तीन करोड़ घुसपैठियों वाले दावे को लेकर भी सवाल उठाए हैं। अमित शाह ने कहा था कि देश में केवल भारतीय नागरिकों को ही वोट देने का अधिकार है। उन्होंने मतदाता सूची से घुसपैठियों के नाम हटाने और उन्हें देश से बाहर भेजने की बात कही थी।
हालांकि, तीन करोड़ घुसपैठियों के आंकड़े को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। एक आरटीआई के जवाब में गृह मंत्रालय ने बताया कि देश में तीन करोड़ घुसपैठियों से जुड़ा कोई केंद्रीय डेटाबेस मौजूद नहीं है। यानी यह आंकड़ा किसी उपलब्ध केंद्रीय सरकारी डेटाबेस पर आधारित नहीं है।
घुसपैठियों की पहचान और निर्वासन में राज्यों की भी जिम्मेदारी
गृह मंत्रालय के मुताबिक, विदेशी नागरिकों की पहचान, उनकी आवाजाही पर पाबंदी और उन्हें देश से बाहर भेजने की शक्तियां विदेशी अधिनियम, 1946 की धारा 3(2)(c) और 3(2)(e) के तहत संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों को सौंपी गई हैं।
इसका मतलब है कि विदेशी नागरिकों की पहचान और निर्वासन की कानूनी प्रक्रिया में राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों की भी अहम भूमिका है। ऐसे मामलों में केवल राजनीतिक बयान से कार्रवाई पूरी नहीं होती, बल्कि निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी होता है।
पवन खेड़ा ने अमित शाह से मांगा इस्तीफा
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने अमित शाह के बयान पर पलटवार करते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी नहीं संभल रही है तो फिर कुर्सी से चिपके रहने का क्या मतलब है।
खेड़ा ने यह सवाल भी उठाया कि सरकार को सत्ता में साढ़े बारह साल हो चुके हैं, फिर भी अगर देश में घुसपैठियों की इतनी बड़ी संख्या है तो उनकी पहचान और निर्वासन के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
हालांकि, पवन खेड़ा का यह बयान कांग्रेस की राजनीतिक प्रतिक्रिया है। इसे सरकार की आधिकारिक नीति या किसी कानूनी निष्कर्ष के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
SIR और चुनाव आयोग को लेकर भी कांग्रेस हमलावर
कांग्रेस लगातार मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सवाल उठा रही है। पार्टी चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन कर रही है।
कांग्रेस का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा जरूरी है। इसी मुद्दे को लेकर पार्टी सड़क से लेकर राजनीतिक मंचों तक अपनी आवाज उठा रही है।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी को दी खुली बहस की चुनौती
इसी बीच राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुले मंच पर बहस करने की चुनौती भी दी है। कांग्रेस इस चुनौती को चुनावी प्रक्रिया, SIR और चुनाव सुधार से जुड़े मुद्दों के साथ जोड़कर उठा रही है।
कुल मिलाकर, कांग्रेस 26 नवंबर को संविधान दिवस के मौके पर दिल्ली में बड़े प्रदर्शन की तैयारी कर रही है। ‘संविधान बचाओ मार्च’ के जरिए पार्टी संविधान, लोकतांत्रिक अधिकारों, मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को उठाएगी। इस कार्यक्रम में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के साथ विपक्षी दलों के सांसदों को भी शामिल करने की कोशिश की जा रही है।
रिपोर्ट : इस्मा टाइम्स न्यूज़ डेस्क.
