वॉशिंगटन — अमेरिका के 2026 मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद एलन मस्क की सियासी शर्त भी पलट गई। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवारों और रूढ़िवादी समूहों के समर्थन में कम से कम क़रीब 445 से 474 मिलियन डॉलर—यानी लगभग ₹4,400 से ₹4,700 करोड़—ख़र्च किए, लेकिन डेमोक्रेट्स ने कांग्रेस के दोनों सदनों पर क़ाबू पा लिया।
नतीजों के बाद मस्क ने अपने एक्स पर “Vote red today!” वाला चुनाव-दिन पोस्ट हटा दिया। उन्होंने 29 अक्टूबर का रिपब्लिकन सिनेटरों को वोट देने की अपील वाला पिन किया हुआ पोस्ट भी हटा दिया।
‘Vote Red Today’ पोस्ट क्यों हटाया?
चुनाव के दिन मस्क ने अपने 24 करोड़ से ज़्यादा एक्स फ़ॉलोअर्स से रिपब्लिकन को वोट देने की अपील की थी। डेमोक्रेट्स की बड़ी जीत के बाद यह पोस्ट उनके प्रोफ़ाइल से ग़ायब हो गया।
मस्क के अपने एआई चैटबॉट ग्रोक ने यूज़र्स को बताया कि मस्क ने चुनाव-दिन वाला पोस्ट और पहले का कम से कम एक रिपब्लिकन समर्थक पिन किया हुआ पोस्ट हटा दिया है।
मगर मस्क ने पोस्ट हटाने की वजह नहीं बताई। इसलिए यह कहना सही है कि उन्होंने रिपब्लिकन समर्थक पोस्ट हटाए; यह कहना कि उन्हें “शर्मिंदगी” महसूस हुई, केवल मीडिया की व्याख्या है।
मस्क ने कितना पैसा लगाया?
अमेरिकी चुनाव आयोग के दाख़िलात और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, मस्क ने इस चुनाव चक्र में रिपब्लिकन उम्मीदवारों व रूढ़िवादी समूहों के लिए कम से कम 445 मिलियन डॉलर ख़र्च किए। कुछ रिपोर्ट्स ने यह रक़म 474 मिलियन डॉलर बताई है।
भारतीय रुपयों में यह क़रीब 4,400 से 4,700 करोड़ रुपये बनता है। बीबीसी ने इसे किसी भी चुनाव चक्र में किसी भी व्यक्ति का सबसे बड़ा चुनावी ख़र्च बताया।
पैसा कहाँ लगा?
द अटलांटिक के मुताबिक़, मस्क ने अपने अमेरिका पैक को 216 मिलियन डॉलर दिए, जिनका बड़ा हिस्सा दरवाज़ा-दरवाज़ा मुहिम और विज्ञापनों में लगा। उन्होंने टेक्सास के रिपब्लिकन सीनेट उम्मीदवार केन पैक्सटन के समर्थन वाले सुपर पैक को 168 मिलियन डॉलर से ज़्यादा दिए।
फ़ोर्ब्स ने भी यही आंकड़े दोहराए: अमेरिका पैक को 216 मिलियन डॉलर और सिनेट लीडरशिप फंड को 168 मिलियन डॉलर। टेक्सास में मस्क का ख़र्च क़रीब 224 मिलियन डॉलर बताया गया।
नेटवर्थ में कितनी गिरावट आई?
फ़ोर्ब्स के मुताबिक़, चुनाव नतीजों के बाद मस्क की नेटवर्थ बुधवार को दोपहर तक 34.5 अरब डॉलर घटी और उनकी कुल संपत्ति क़रीब 867.2 अरब डॉलर रह गई। इसकी बड़ी वजह टेस्ला और स्पेसएक्स के शेयरों में गिरावट थी।
एपी ने बताया कि मस्क की नेटवर्थ बुधवार को क़रीब 45 अरब डॉलर घटी और उनकी कुल संपत्ति 865.6 अरब डॉलर रह गई। कुछ रिपोर्ट्स ने गिरावट 28 से 42 अरब डॉलर के बीच भी बताई, क्योंकि शेयरों की क़ीमतें लगातार बदलती रहीं।
“₹2 लाख करोड़” कितना सही?
34.5 अरब डॉलर क़रीब 2.9 लाख करोड़ रुपये बनते हैं, जबकि 45 अरब डॉलर क़रीब 3.8 लाख करोड़ रुपये बनते हैं। इसलिए “नेटवर्थ ₹2 लाख करोड़ घटी” कहना ग़लत नहीं, मगर यह न्यूनतम अंदाज़े से भी कम लगता है।
सबसे संतुलित बात यह है कि चुनाव नतीजों के बाद मस्क की नेटवर्थ में एक ही दिन में क़रीब 30 से 45 अरब डॉलर—यानी लगभग 2.5 से 3.8 लाख करोड़ रुपये—की गिरावट आई। यह सीधे चुनावी हार का “जुर्माना” नहीं, बल्कि बाज़ार का यह अंदाज़ा है कि डेमोक्रेटिक कांग्रेस मस्क की कंपनियों पर ज़्यादा जांच और नियंत्रण कर सकती है।
रिपब्लिकन क्यों हारे?
डेमोक्रेट्स ने हाउस और सीनेट दोनों पर क़ाबू पा लिया। इसके पीछे महँगाई, महँगा जीवन-ख़र्च, ईरान से जंग और ट्रंप सरकार पर जवाबदेही की मांग बड़े मुद्दे रहे।
मस्क का ख़र्च बड़ा था, मगर वह रिपब्लिकनों को बचाने में नाकाम रहा। बीबीसी ने लिखा कि मस्क ने किसी भी चुनाव चक्र में किसी भी व्यक्ति से ज़्यादा पैसा ख़र्च किया, फिर भी डेमोक्रेट्स की बड़ी जीत नहीं रोक सके।
क्या मस्क का ख़र्च नुक़सानदेह भी रहा?
द अटलांटिक की रिपोर्ट में यह संभावना जताई गई कि मस्क का अभूतपूर्व ख़र्च रिपब्लिकनों के लिए उल्टा भी पड़ा हो। रिपोर्ट के मुताबिक़, मस्क के योगदान 2026 में रिपब्लिकनों को मिले कुल चंदे का क़रीब एक-चौथाई थे।
यह एक विश्लेषण है, कोई चुनाव आयोग का तथ्य नहीं। इसलिए यह कहना ठीक है कि मस्क का बड़ा ख़र्च असर नहीं छोड़ पाया; यह कहना कि उसने रिपब्लिकनों को हराया, अभी पक्का नहीं किया जा सकता।
अब मस्क के लिए क्या ख़तरा है?
डेमोक्रेटिक कांग्रेस के पास अब ट्रंप प्रशासन, मस्क की कंपनियों और सरकारी ठेकों की जांच के लिए सुनवाई व सम्मन जारी करने की ज़्यादा ताक़त होगी। यही वजह है कि नतीजों के बाद टेस्ला और स्पेसएक्स के शेयरों में गिरावट आई।
मस्क की नेटवर्थ का बड़ा हिस्सा टेस्ला और स्पेसएक्स की हिस्सेदारी से जुड़ा है। इसलिए सियासी नतीजों का असर सीधे बाज़ार और उनकी संपत्ति पर दिखा।
आख़िर में
एलन मस्क ने रिपब्लिकनों के लिए ऐतिहासिक रक़म ख़र्च की, रिपब्लिकन हारे, और उन्होंने अपने सबसे चर्चित रिपब्लिकन समर्थक पोस्ट हटा दिए। उनकी नेटवर्थ में भी अरबों डॉलर की गिरावट आई, मगर यह गिरावट बाज़ार के अंदाज़े और शेयरों की हलचल से जुड़ी है, किसी सीधे “सज़ा” से नहीं।
सबसे बड़ा सबक़ यह है कि पैसा चुनावी नतीजों को बदल सकता है, मगर हमेशा नहीं। मस्क का क़रीब आधा अरब डॉलर का ख़र्च रिपब्लिकनों को बचाने में नाकाम रहा और उनकी अपनी कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव बन गया।
रिपोर्ट : इस्मा टाइम्स न्यूज़ डेस्क.
