गया, बिहार: गया के जीबीएम कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग और वैलनेस क्लब की ओर से आत्महत्या रोकथाम एवं मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता को लेकर दो दिवसीय सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम कॉलेज की प्रधानाचार्य एवं संरक्षक डॉ. सीमा पटेल के मार्गदर्शन में तथा आईक्यूएसी के तत्वावधान में हुआ।
मनोविज्ञान विभाग की वरीय सहायक प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष प्रीति शेखर के संयोजन में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य विषय “आत्महत्या के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव – चेंजिंग द नैरेटिव ऑन सुसाइड” रहा।
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या रोकथाम से जुड़े पोस्टर और स्लोगन तैयार किए। इसके अलावा सरकारी विद्यालय रामरुचि बालिका विद्यालय में जाकर विद्यार्थियों के बीच भी जागरूकता कार्यक्रम चलाया गया।

मानसिक परेशानी छिपाने के बजाय बातचीत पर जोर
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक सहयोग और जीवन के प्रति सकारात्मक सोच के महत्व को समझाना था। उन्हें यह भी बताया गया कि मानसिक तनाव या भावनात्मक परेशानी के समय मदद मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि एक जरूरी कदम है।
इस दौरान विद्यार्थियों के साथ इंटरैक्टिव टॉक और संवाद सत्र भी आयोजित किया गया। विद्यार्थियों ने इसमें सक्रियता से हिस्सा लिया और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने सवाल और विचार साझा किए।
उन्हें सलाह दी गई कि मानसिक परेशानी को अकेले सहने या छिपाने के बजाय किसी भरोसेमंद व्यक्ति, शिक्षक, अभिभावक, काउंसलर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बातचीत करनी चाहिए। कार्यक्रम में आपसी सहयोग और समय रहते मदद लेने की अहमियत पर भी जोर दिया गया।
‘आशाएँ’ नाटक के जरिए दिया जीवन का संदेश
जागरूकता कार्यक्रम का खास आकर्षण ‘आशाएँ’ नामक मनोवैज्ञानिक जागरूकता नाटक रहा। सरकारी रामरुचि बालिका विद्यालय में प्रस्तुत इस नाटक में छात्राओं ने अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं।
नाटक में कुमारी हर्षिता, कोमल कुमारी, खुशी कुमारी, काजल कुमारी, साधना प्रिया, संचित कुमारी, वैष्णवी कुमारी, प्रिया कुमारी, नेहा कुमारी, चाहत कुमारी वर्मा और रिया कुमारी समेत छात्राओं ने हिस्सा लिया।
अपने अभिनय के माध्यम से छात्राओं ने मानसिक संघर्ष, भावनात्मक परेशानियों, आपसी सहयोग और जीवन में उम्मीद के महत्व को सामने रखा। नाटक ने यह संदेश देने की कोशिश की कि कठिन दौर को जीवन का अंत मानने के बजाय बातचीत, सहयोग और सही समय पर मदद की जरूरत के तौर पर देखा जाना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को एक-दूसरे की भावनात्मक स्थिति के प्रति संवेदनशील रहने और किसी साथी में गंभीर मानसिक परेशानी के संकेत नजर आने पर उसे अकेला न छोड़ने के लिए भी प्रेरित किया गया।
प्रधानाचार्य ने आयोजन को बताया उम्मीद की किरण
कॉलेज की प्रधानाचार्य डॉ. सीमा पटेल ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम समाज में जागरूकता बढ़ाने के साथ लोगों के भीतर नई उम्मीद भी पैदा करते हैं। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषय पर विद्यार्थियों के बीच खुलकर संवाद को जरूरी बताया।
कॉलेज की इस पहल के जरिए विद्यार्थियों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य की तरह ही महत्वपूर्ण है और परेशानी के समय सही व्यक्ति तक पहुंचकर मदद लेना जरूरी है।
रिपोर्ट : विश्वनाथ आनंद.
