अभियंता दिवस 2026: सर एम. विश्वेश्वरैया की जयंती, जीवन और विरासत

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हर साल 15 सितंबर को भारत में अभियंता दिवस मनाया जाता है। यह तारीख़ महज एक संयोग नहीं, बल्कि एक सुनियोजित चुनाव है—क्योंकि इसी दिन सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया (सर एम.वी.) का जन्म हुआ था। आधुनिक भारत के निर्माण में उनके अद्वितीय योगदान को याद करते हुए, इस दिन उन्हें कोटि-कोटि नमन किया जाता है।

सर एम. विश्वेश्वरैया कौन थे?

सर एम. विश्वेश्वरैया का पूरा नाम सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया था। वे भारत के महान सिविल इंजीनियर, प्रशासक और राष्ट्र-निर्माताओं में गिने जाते हैं। उनका जन्म 15 सितंबर 1861 को कर्नाटक के मुद्देनाहल्ली गांव में हुआ था।

उन्होंने जल प्रबंधन, सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण और बांध निर्माण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए। वे मैसूर रियासत के 19वें दीवान रहे और 1912 से 1918 के बीच प्रशासनिक तथा औद्योगिक विकास को गति दी।

विश्वेश्वरैया को आधुनिक मैसूर के विकास में उनके योगदान के लिए विशेष रूप से याद किया जाता है। उन्होंने शिक्षा, उद्योग, सिंचाई और जल-संसाधन प्रबंधन को देश की प्रगति का आधार माना। पानी का स्तर नियंत्रित करने वाली स्वचालित गेट प्रणाली के विकास में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान था।

उन्हें वर्ष 1955 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया। उनकी जयंती, 15 सितंबर, को भारत में राष्ट्रीय अभियंता दिवस (Engineers’ Day) के रूप में मनाया जाता है।

उनका निधन 14 अप्रैल 1962 को हुआ। Sir M. Visvesvaraya को आज भी तकनीकी उत्कृष्टता, अनुशासन और राष्ट्र-निर्माण की प्रेरणा के रूप में याद किया जाता है।

क्यों मनाया जाता है अभियंता दिवस?

अभियंता दिवस का उद्देश्य केवल एक महान व्यक्तित्व को याद करना नहीं, बल्कि ज्ञान, विज्ञान, तकनीक और नवाचार के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में लगे समस्त अभियंताओं को सम्मानित करना है। यह दिन उन सभी इंजीनियर्स के प्रति आभार व्यक्त करने का मौका है, जो देश की बुनियादी ढांचा, तकनीकी प्रगति और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

सर एम.वी. की विरासत: ज्ञान और सेवा का संगम

सर एम. विश्वेश्वरैया का जीवन ज्ञान और सेवा का अनूठा संगम था। उन्होंने न केवल तकनीकी क्षेत्र में बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास में भी गहरी छाप छोड़ी। उनकी सोच थी कि तकनीक और इंजीनियरिंग के माध्यम से ही देश की गरीबी और पिछड़ेपन को दूर किया जा सकता है।

आज के संदर्भ में, जब भारत ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने की ओर अग्रसर है, तब सर एम.वी. का संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है। युवा इंजीनियर्स और तकनीकी विशेषज्ञों के लिए उनका जीवन एक प्रेरणा स्रोत है—कि कैसे दूरदर्शिता, अनुशासन और समर्पण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया जा सकता है।

रिपोर्ट : इस्मा टाइम्स न्यूज़ डेस्क.

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