औरंगाबाद, बिहार: रफीगंज नगर पंचायत से करीब छह किलोमीटर दूर पोगर पंचायत के निवासी रामाधार सिंह का रविवार, 20 सितंबर 2026 को निधन हो गया। सोमवार, 21 सितंबर को धावा नदी के किनारे स्थित गांव के श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम संस्कार में परिवार के सदस्यों के अलावा बड़ी संख्या में ग्रामीण और स्थानीय लोग शामिल हुए।
रामाधार सिंह, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के वरिष्ठ नेता वीरेंद्र कुमार सिंह के बड़े भाई थे। परिजनों के अनुसार, उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। उन्हें पहले रफीगंज के एक निजी क्लिनिक में ले जाया गया। हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए गया स्थित अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर कर दिया।
इलाज के दौरान बिगड़ी तबीयत
परिजनों के मुताबिक, अस्पताल में इलाज के बाद रामाधार सिंह की हालत कुछ समय के लिए स्थिर हुई थी। उन्होंने खाना भी खाया था, लेकिन बाद में उनकी तबीयत अचानक फिर बिगड़ गई। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
इसके बाद परिजन शव को पोगर स्थित पैतृक घर ले आए। सोमवार को गांव के श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया।
रामाधार सिंह के एक पुत्र मुकेश कुमार सिंह पोगर पंचायत के पंचायत समिति सदस्य हैं। उनके दूसरे पुत्र सुधीर सिंह सेना में कार्यरत बताए गए हैं। परिजनों के अनुसार, उनके पहुंचने में देरी के कारण अंतिम संस्कार अगले दिन किया गया।
अंतिम संस्कार में शामिल हुए स्थानीय लोग
रामाधार सिंह के अंतिम संस्कार में रफीगंज विधानसभा क्षेत्र के पूर्व लोजपा प्रत्याशी और व्यवसायी मनोज कुमार सिंह तथा लोजपा के पूर्व रफीगंज प्रखंड अध्यक्ष विनोद दास समेत कई स्थानीय लोग शामिल हुए।
परिजनों और ग्रामीणों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

श्मशान घाट तक पहुंचने में ग्रामीणों को परेशानी
रामाधार सिंह के अंतिम संस्कार के दौरान पोगर गांव के श्मशान घाट तक पहुंचने का मुद्दा भी सामने आया। ग्रामीणों का कहना है कि घाट तक जाने के लिए पक्की सड़क तो दूर, ठीक से पैदल चलने लायक रास्ता भी नहीं है।
ग्रामीणों के अनुसार, शव को श्मशान घाट तक ले जाने के लिए खेती की जमीन के बीच बनी संकरी मेड़ों का सहारा लेना पड़ता है। बरसात के मौसम में यह रास्ता फिसलन भरा और जोखिमपूर्ण हो जाता है। श्मशान घाट के आसपास झाड़ियां और जंगल होने के कारण लोगों को अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ती है।
नहर का रास्ता खत्म होने के बाद बढ़ती है मुश्किल
ग्रामीणों ने बताया कि पोगर का श्मशान घाट धावा नदी के किनारे स्थित है। आम तौर पर लोग सोन उच्च स्तरीय नहर के किनारे बने रास्ते से शव लेकर जाते हैं। लेकिन नहर का रास्ता खत्म होने के बाद श्मशान घाट तक करीब एक किलोमीटर की दूरी कच्चे और असुविधाजनक रास्ते से तय करनी पड़ती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस हिस्से में कई जगह निजी जमीन आती है। इसी वजह से सार्वजनिक रास्ते का निर्माण अब तक नहीं हो सका है। ग्रामीणों के अनुसार, अंतिम संस्कार जैसे जरूरी काम के समय यह समस्या सबसे अधिक गंभीर हो जाती है।
ग्रामीणों ने पक्की सड़क की मांग की
पोगर पंचायत के लोगों ने प्रशासन से श्मशान घाट तक पहुंचने के लिए स्थायी सड़क या कम से कम सुगम संपर्क मार्ग बनाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि मतदाता सूची के अनुसार गांव में मतदाताओं की संख्या करीब 2,100 है और यहां अलग-अलग समुदायों के लोग रहते हैं। इसके बावजूद श्मशान घाट तक सुरक्षित रास्ता नहीं होना गंभीर जनसुविधा का मुद्दा है।
ग्रामीणों के मुताबिक, यह रास्ता केवल अंतिम संस्कार के लिए ही नहीं, बल्कि नदी किनारे जाने और आपात स्थिति में भी जरूरी है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से स्थल का निरीक्षण कर सड़क निर्माण की दिशा में जल्द कदम उठाने की अपील की है।
नोट: उपलब्ध स्थानीय रिपोर्टों में रामाधार सिंह की मृत्यु का कारण स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं है। इसलिए इसे परिजनों द्वारा बताई गई जानकारी के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है। अंतिम संस्कार और श्मशान घाट तक रास्ते की समस्या से जुड़े दावों की भी आधिकारिक पुष्टि स्थानीय प्रशासन से की जानी चाहिए।
रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय/ अनिल कुमार विश्वकर्मा.
