बिहार के औरंगाबाद जिले में रफीगंज विधानसभा क्षेत्र के जदयू विधायक प्रमोद कुमार सिंह को लेकर विवाद सामने आया है। मदनपुर थाना क्षेत्र की खिरियावां पंचायत के बरडीह गांव के एक टोले में रहने वाले व्यक्ति ने विधायक पर धमकी देने का आरोप लगाया है। इस मामले पर विधायक ने अपना पक्ष रखते हुए आरोपों को खारिज किया और पूरे विवाद की वजह शराब से जुड़े एक पुराने मामले तथा सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो को बताया।
मामले को लेकर संवाददाता ने विधायक प्रमोद कुमार सिंह से बातचीत की। इस दौरान विधायक ने कहा कि संबंधित व्यक्ति का टेंपो करीब तीन महीने पहले शराब के मामले में पकड़ा गया था। उनके मुताबिक, उस व्यक्ति ने इस मामले में उनसे पैरवी करने को कहा था, लेकिन उन्होंने कथित तौर पर अवैध शराब और गांजे से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था।
शराब मामले में पैरवी नहीं करने से शुरू हुआ विवाद: विधायक
विधायक प्रमोद कुमार सिंह ने अपने बयान में दावा किया कि संबंधित व्यक्ति उनसे शराब के मामले में मदद चाहता था। उन्होंने कहा कि अवैध गतिविधियों से जुड़े मामलों में पैरवी करना उनके लिए उचित नहीं है। विधायक के अनुसार, इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद बढ़ा।
उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित व्यक्ति ने उनके पुराने वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित किया। विधायक ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के वीडियो या बयान को संदर्भ से अलग करके चलाना उचित नहीं है। उन्होंने संबंधित व्यक्ति को पढ़ाई, कारोबार और अच्छे कामों पर ध्यान देने की सलाह देने की बात भी कही।
हालांकि, धमकी दिए जाने के आरोप पर विधायक ने स्पष्ट रूप से इनकार किया। उनका कहना है कि उन्होंने न तो जान से मारने की धमकी दी और न ही ऐसा कोई बयान दिया, जिसे धमकी माना जाए।
विकास कार्यों को लेकर उठे सवाल पर विधायक ने क्या कहा?
163 योजनाओं का सोशल मीडिया पर किया जिक्र
बातचीत के दौरान संवाददाता ने विधायक से उस ऑडियो का हवाला देते हुए सवाल किया, जिसमें संबंधित व्यक्ति कथित तौर पर विधानसभा क्षेत्र में हुए विकास कार्यों को लेकर सवाल उठा रहा है। व्यक्ति ने यह भी कहा था कि उसने पूर्व विधायक मोहम्मद नेहालुद्दीन का भी विरोध किया था।
इस पर प्रमोद कुमार सिंह ने कहा कि वह पिछले 12-13 वर्षों से विकास कार्यों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने अपने निजी धन से भी क्षेत्र में विकास के काम कराए हैं। विधायक के अनुसार, वह ऐसे पहले विधायक हैं, जिन्होंने अपनी 163 विकास योजनाओं को सोशल मीडिया पर साझा किया है।
उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि पहले क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके नेताओं और तीन बार से सांसद रहे जनप्रतिनिधि से भी विकास कार्यों को लेकर सवाल किए जाने चाहिए। उनका कहना था कि विकास की बात उन्हीं लोगों से होनी चाहिए, जिन्होंने क्षेत्र में काम किया हो।
मदनपुर में डिग्री कॉलेज को लेकर भी दिया बयान
विधायक ने मदनपुर में डिग्री कॉलेज का जिक्र करते हुए कहा कि कॉलेज के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) मिल चुका है और भवन निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि फिलहाल डिग्री कॉलेज संचालित हो रहा है।
विधायक ने यह भी कहा कि संबंधित व्यक्ति को उनके विकास कार्यों की पूरी जानकारी नहीं है और वह कुछ नेताओं के कहने पर यह विवाद खड़ा कर रहा है। हालांकि, ये विधायक के अपने दावे हैं और विकास कार्यों से जुड़े सभी पहलुओं की स्वतंत्र पुष्टि इस बातचीत में नहीं हुई है।
पूर्व विधायक अशोक कुमार सिंह की टिप्पणी पर भी दी प्रतिक्रिया
वीडियो से छेड़छाड़ का आरोप, साइबर पुलिस में शिकायत की बात
संवाददाता ने जब विधायक से पूछा कि रफीगंज में पहले दस वर्षों तक जदयू के विधायक रहे और अब राजद से जुड़े अशोक कुमार सिंह ने भी सोशल मीडिया पोस्ट पर तंज कसा है, तो प्रमोद कुमार सिंह ने उनकी टिप्पणी पर नाराजगी जताई।
विधायक ने कहा कि धमकी और सामान्य बातचीत के बीच अंतर समझना जरूरी है। उन्होंने दोहराया कि उन्होंने संबंधित व्यक्ति को धमकी नहीं दी है। साथ ही, उन्होंने आरोप लगाया कि उनके और उस व्यक्ति के बीच हुई बातचीत का पूरा ऑडियो-वीडियो सार्वजनिक नहीं किया गया और उसे कथित तौर पर काट-छांटकर प्रसारित किया गया।
प्रमोद कुमार सिंह ने कहा कि वह इस मामले में साइबर पुलिस के पास शिकायत करेंगे और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की बात भी कही। उन्होंने अपने बयान में यह भी आरोप लगाया कि शराब के मामले में पैरवी नहीं करने के कारण ही उनके वीडियो को प्रसारित किया गया।
मामले में अब आगे क्या होगा?
फिलहाल, इस पूरे विवाद में एक पक्ष की ओर से विधायक पर धमकी देने का आरोप लगाया गया है, जबकि विधायक ने इन आरोपों को नकारते हुए वीडियो से छेड़छाड़ और पुराने शराब मामले को विवाद की वजह बताया है। उपलब्ध बातचीत के आधार पर आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती है।
मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित व्यक्ति का पक्ष, मूल ऑडियो-वीडियो और यदि शिकायत दर्ज होती है तो पुलिस की कार्रवाई अहम होगी। इन तथ्यों के सामने आने के बाद ही विवाद की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय.
