आज देश के लोकतंत्र संविधान और मताधिकार की रक्षा का सवाल पूरे देश के सामने खड़ा है-कांग्रेस.

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बिहार -प्रदेश (26 अक्टूबर 2026)-आज देश के लोकतंत्र, संविधान और मताधिकार की रक्षा का सवाल पूरे देश के सामने खड़ा है। कांग्रेस पार्टी का स्पष्ट मानना है कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है और जनता के वोट से ही सरकार बनती है। यदि मतदाता सूची से पात्र नागरिकों के नाम गलत तरीके से हटाए जाते हैं, तो यह केवल प्रशासनिक चूक का मामला नहीं, बल्कि नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय है।

देशभर में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों के मसौदों से लगभग 13.37 करोड़ नाम हटाए जाने की खबरों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यह आंकड़ा मसौदा मतदाता सूचियों से हटाए गए नामों का है; इसे अंतिम रूप से अपात्र घोषित किए गए मतदाताओं की संख्या नहीं माना जाना चाहिए। फिर भी, इतने बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने की प्रक्रिया, उसके आधार और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर पारदर्शी जवाबदेही आवश्यक है।

कांग्रेस पार्टी का आरोप है कि एसआईआर की प्रक्रिया में वास्तविक मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटने और पात्र नागरिकों के मताधिकार से वंचित होने का खतरा पैदा हुआ है। निर्वाचन आयोग को देश के प्रत्येक नागरिक के इस सवाल का जवाब देना चाहिए कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में कितनी सावधानी बरती गई और जिन पात्र मतदाताओं के नाम छूट गए, उन्हें समय पर न्याय कैसे मिलेगा।

एसआईआर पर गंभीर सवाल, निर्वाचन आयोग जवाब दे

लोकसभा में विपक्ष के नेता श्री राहुल गांधी जी लंबे समय से चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठा रहे हैं। कांग्रेस पार्टी का कहना है कि एसआईआर के दौरान सामने आई शिकायतों और निर्वाचन आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों ने इन सवालों को और गंभीर बना दिया है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, निर्वाचन आयुक्त श्री सुखबीर सिंह संधू और श्री विवेक जोशी ने पिछले लगभग दस महीनों में मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने, बहाल करने और संबंधित प्रक्रियाओं को लेकर कई बार लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। एक रिपोर्ट में ऐसी 14 आपत्तियों का उल्लेख किया गया है। इन रिपोर्टों के आलोक में यह जरूरी है कि निर्वाचन आयोग इन आपत्तियों, उनके निस्तारण और संबंधित निर्णयों का पूरा विवरण सार्वजनिक करे।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में लिए गए निर्णयों की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए। कांग्रेस पार्टी का आरोप है कि एसआईआर के संचालन में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर संदेह उत्पन्न हुए हैं। इन संदेहों का समाधान केवल बयानबाजी से नहीं, बल्कि दस्तावेजों, तथ्यों और स्वतंत्र जांच से होना चाहिए।

क्या मतदाता सूची का शुद्धीकरण पात्र मतदाताओं को बाहर करने का माध्यम बन रहा है?

मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाना निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है। मृत मतदाताओं, दोहरी प्रविष्टियों और अन्य वैधानिक रूप से अपात्र प्रविष्टियों को हटाने की आवश्यकता से कोई इनकार नहीं करता। लेकिन इस प्रक्रिया में किसी जीवित, पात्र और वास्तविक मतदाता का नाम गलत तरीके से हट जाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

कांग्रेस पार्टी का आरोप है कि एसआईआर के दौरान पात्र मतदाताओं को पर्याप्त अवसर देने, दस्तावेजों के सत्यापन, आपत्तियों के निस्तारण और नाम बहाल करने की प्रक्रिया में गंभीर कमियां रही हैं। गरीबों, मजदूरों, प्रवासी नागरिकों, बुजुर्गों और दस्तावेज जुटाने में कठिनाई का सामना करने वाले लोगों को विशेष सुरक्षा मिलनी चाहिए।

भाजपा द्वारा घुसपैठियों और राष्ट्रवाद के मुद्दे उठाए जाने के बीच कांग्रेस यह सवाल पूछती है कि क्या किसी भी नागरिक को केवल राजनीतिक या सामाजिक पहचान के आधार पर मताधिकार से वंचित किया जा सकता है? किसी भी प्रकार की चयनात्मक कार्रवाई का आरोप गंभीर है और इसकी जांच प्रमाणों के आधार पर होनी चाहिए।

मतदाता सूची का शुद्धीकरण तभी स्वीकार्य है, जब वह निष्पक्ष, पारदर्शी, कानूनसम्मत और प्रत्येक पात्र नागरिक के मताधिकार की रक्षा करने वाला हो।

ज्ञानेश कुमार की भूमिका और निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता

कांग्रेस पार्टी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि एसआईआर के दौरान लिए गए कुछ निर्णयों ने निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता को लेकर संदेह पैदा किया है।

निर्वाचन आयोग केवल एक संवैधानिक संस्था नहीं, बल्कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों का आधार है। उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठना पूरे लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। इसलिए निर्वाचन आयोग को अपने निर्णयों, आंतरिक आपत्तियों और मतदाता सूची में नाम जोड़ने तथा हटाने की प्रक्रिया पर विस्तृत स्पष्टीकरण देना चाहिए।

कांग्रेस पार्टी की मांग है कि इन आरोपों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच में किसी अधिकारी या पदाधिकारी की जिम्मेदारी प्रमाणित होती है, तो उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और जवाबदेही पर भी हो चर्चा

दिसंबर 2023 में संसद से पारित मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम ने नियुक्ति समिति की संरचना निर्धारित की। इस व्यवस्था में प्रधानमंत्री, प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय मंत्रिमंडल के एक सदस्य और लोकसभा में विपक्ष के नेता को शामिल किया गया है। इससे पहले मार्च 2023 में सर्वोच्च न्यायालय ने कानून बनने तक नियुक्ति समिति में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल करने का निर्देश दिया था।

कांग्रेस पार्टी का मत है कि निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता और नियुक्ति प्रक्रिया में कार्यपालिका के प्रभाव को लेकर गंभीर लोकतांत्रिक बहस आवश्यक है। नियुक्ति प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिससे निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर जनता का विश्वास मजबूत हो।

वर्ष 2023 के कानून में निर्वाचन आयुक्तों को उनके आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन के संबंध में दी गई कानूनी सुरक्षा पर भी पुनर्विचार होना चाहिए, ताकि जवाबदेही और स्वतंत्रता के बीच उचित संतुलन बना रहे। किसी भी संवैधानिक पदाधिकारी को कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता।

राहुल गांधी जी ने उठाए सवाल, अब तथ्यों के आधार पर जवाब जरूरी

लोकसभा में विपक्ष के नेता श्री राहुल गांधी जी ने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर लगातार सवाल उठाए हैं। कांग्रेस पार्टी का कहना है कि एसआईआर के दौरान सामने आए आंकड़ों, शिकायतों और निर्वाचन आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों की गंभीरता को देखते हुए इन सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

कांग्रेस की मांग है कि निर्वाचन आयोग सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करे कि कितने नाम हटाए गए, उनमें से कितने मृत, स्थानांतरित, दोहरी प्रविष्टि वाले या अन्य कारणों से हटाए गए, कितने पात्र मतदाताओं ने आपत्तियां दर्ज कीं और कितने लोगों के नाम दोबारा जोड़े गए।

साथ ही, जिन पात्र मतदाताओं के नाम गलती से हट गए हैं, उनके नाम बहाल करने की सरल, समयबद्ध और सुलभ व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध नहीं है। मताधिकार की रक्षा करना विपक्ष का ही नहीं, हर संवैधानिक संस्था और प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।

बिहार सहित विभिन्न राज्यों में चुनावी प्रक्रिया पर उठे सवाल

बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और असम सहित विभिन्न राज्यों में चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और एसआईआर को लेकर राजनीतिक विवाद और सवाल सामने आए हैं। इन राज्यों की परिस्थितियां और प्रक्रियाएं एक जैसी नहीं हैं, इसलिए प्रत्येक मामले की जांच संबंधित तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर की जानी चाहिए।

कांग्रेस पार्टी का आरोप है कि इन विवादों ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता को और बढ़ा दिया है। निर्वाचन आयोग को किसी भी राजनीतिक दल के आरोपों को केवल राजनीतिक बयान बताकर खारिज करने के बजाय तथ्यों के साथ उनका जवाब देना चाहिए।

यदि किसी राज्य में पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं, तो उन्हें बहाल करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। किसी भी नागरिक को प्रशासनिक प्रक्रिया की जटिलता या संसाधनों की कमी के कारण अपने मताधिकार से वंचित नहीं होना चाहिए।

क्या चुनावी प्रक्रिया पर जनता का विश्वास कायम है?

चुनाव लोकतंत्र का उत्सव तभी बनता है, जब प्रत्येक पात्र नागरिक को यह भरोसा हो कि उसका वोट सुरक्षित है और उसकी आवाज का सम्मान किया जाएगा। यदि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव होते हैं और उन बदलावों को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं, तो निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है कि वह हर सवाल का पारदर्शी जवाब दे।

कांग्रेस पार्टी का आरोप है कि भाजपा और केंद्र सरकार की नीतियों ने निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता को लेकर संदेह पैदा किया है। इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि चुनावी प्रक्रिया किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में प्रभावित न हो।

कांग्रेस यह भी स्पष्ट करना चाहती है कि चुनाव में जीत या हार अपने आप में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं है। इसी प्रकार, केवल आरोप लगा देने से वोट चोरी सिद्ध नहीं हो जाती। प्रत्येक शिकायत की जांच तथ्यों, दस्तावेजों और वैधानिक प्रक्रिया के आधार पर होनी चाहिए। लेकिन गंभीर शिकायतों की निष्पक्ष जांच से बचना भी उचित नहीं है।

कांग्रेस पार्टी की प्रमुख मांगें

कांग्रेस पार्टी निम्नलिखित मांगें करती है:

एसआईआर प्रक्रिया में नाम जोड़ने और हटाने से संबंधित सभी निर्णयों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।

मतदाता सूची से हटाए गए नामों का राज्यवार और श्रेणीवार विवरण सार्वजनिक किया जाए।

जिन पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं, उनके नाम तत्काल और सरल प्रक्रिया के माध्यम से बहाल किए जाएं।

मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने से संबंधित शिकायतों तथा निर्वाचन आयुक्तों की लिखित आपत्तियों पर निर्वाचन आयोग विस्तृत जवाब दे।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार की भूमिका और विवादित निर्णयों की निष्पक्ष समीक्षा हो। आरोप प्रमाणित होने पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

एसआईआर की विवादित प्रक्रियाओं की समीक्षा होने तक ऐसे कदमों पर रोक लगाने पर विचार किया जाए, जिनसे पात्र मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।

निर्वाचन आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया और उसकी संस्थागत स्वतंत्रता को मजबूत करने के लिए व्यापक लोकतांत्रिक चर्चा कर आवश्यक सुधार किए जाएं।

गरीबों, मजदूरों, प्रवासी नागरिकों, महिलाओं, बुजुर्गों और दस्तावेज जुटाने में कठिनाई का सामना करने वाले पात्र मतदाताओं के लिए विशेष सहायता व्यवस्था बनाई जाए।

संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए कांग्रेस का संघर्ष जारी रहेगा

भारत की स्वतंत्रता के लिए कांग्रेस के नेताओं और असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों ने संघर्ष किया। देश के संविधान निर्माण और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थापना में डॉ. भीमराव आंबेडकर, डॉ. राजेंद्र प्रसाद तथा अनेक महान व्यक्तित्वों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

आज संविधान, लोकतांत्रिक अधिकारों और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों की रक्षा करना प्रत्येक भारतीय की साझा जिम्मेदारी है। कांग्रेस पार्टी का कहना है कि मताधिकार की रक्षा के लिए उसका संघर्ष किसी एक चुनाव या राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है। यह देश के नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा सवाल है।

कांग्रेस पार्टी संसद से सड़क तक, प्रेस वार्ताओं से जनसभाओं तक और लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों के माध्यम से इस मुद्दे को उठाती रहेगी। जनता के बीच जाकर मतदाता सूची की समस्याओं के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाएगी और प्रभावित नागरिकों की शिकायतों को उचित मंचों तक पहुंचाया जाएगा।

हमारी मांग स्पष्ट है—मतदाता सूची में पारदर्शिता हो, पात्र नागरिकों के नाम सुरक्षित रहें, निर्वाचन आयोग निष्पक्षता के साथ काम करे और किसी भी अनियमितता के लिए जिम्मेदारी तय हो।

वोट जनता का अधिकार है, किसी सरकार की कृपा नहीं। लोकतंत्र जनता की ताकत है, किसी राजनीतिक दल की जागीर नहीं।

कांग्रेस पार्टी संविधान, लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा के लिए अपनी लोकतांत्रिक लड़ाई जारी रखेगी।

उपर्युक्त बातें आज गया  जिला कॉंग्रेस कार्यालय राजेंद्र आश्रम में अखिल भारतीय कॉंग्रेस कमिटी के ऑब्जर्वर छत्तीसगढ़ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सह पूर्व मंत्री मोहन मरकाम ने कही ।

प्रेस कांफ्रेंस में उपस्थित गया जिला कॉंग्रेस कमिटी के अध्यक्ष रजनीश कुमार झुंना ने ए आई सी सी के ऑब्जर्वर का स्वागत करते हुए उपस्थित जिला के सभी सम्मानित  नेताओं का ऑब्जर्वर से परिचय कराया।

प्रेस कांफ्रेंस में बिहार प्रदेश कॉंग्रेस कमिटी के प्रदेश उपाध्यक्ष सह पूर्व उपमहापौर मोहन श्रीवासतव, सत्येंद्र नारायण सिंह,  प्रदेश प्रतिनिधि विजय कुमार मिट्ठू, जिला उपाध्यक्ष युगल किशोर सिंह, विद्या शर्मा,  रामाश्रय सिंह, मदीना खातून,  मोहम्मद नवाब अली, सैफुल इस्लाम, अशोक भारती,  नगर प्रखंड  दो के अध्यक्ष अर्जुन गुप्ता, नवीन  कुमार, धर्मेंद्र शर्मा,  ओंकार शक्ति, नवल किशोर शर्मा,  राजीव कुमार सिंह उर्फ लबी सिंह, कौशल श्रीवसतव, गोपाल पासवान,  ब्रजेश राय, मानपूर प्रखंड अध्यक्ष चंदन कुमार महतो,  टिकारी प्रखंड अध्यक्ष नाथून पासवान, कोंच प्रखंड अध्यक्ष ईमारान अहमद, अंजारूल हक, पंकज पासवान,  मिथिलेश कुमार सिंह, शिवनाथ प्रसाद निराला, कैलाश प्रसाद यादव, राज् कुमार सोती,  परशुराम सिंह, सहित कई साथी मौजूद रहे।

इस अवसर पर जिला के उपस्थित सभी नेताओं ने 01 नवंबर 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित होने वाले वोट बचाओ, लोकतंत्र बचाओ, देश बचाओ महारैलि में शामिल होने  का संकल्प दोहराया। गया जिला से सैकड़ों की संख्या में कॉंग्रेसजन महारैलि शामिल होने के लिए  30 एवं 31 अक्टूबर 2026 को ही विभिन्न ट्रेनें तथा सड़क मार्ग से अपने- अपने हाथों में झंडा़, बैनर,  पोस्टर लेकर दिल्ली के लिए रवाना होंगे।

रिपोर्ट : विश्वनाथ आनंद.

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