नई दिल्ली: दिल्ली के छोटे एवं मध्यम उद्योगों को मजबूत बनाने और उन्हें देश-विदेश के बाजारों से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों का एपेक्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष डॉ. कपिल चोपड़ा ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि छोटे उद्यमों को तकनीकी सहयोग, गुणवत्ता प्रमाणन, ऋण की उपलब्धता, सरकारी मंजूरियों और नए बाजारों तक पहुंच दिलाने से उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ावा मिल सकता है।
केंद्र सरकार की MSME पहलों में भी बाजार पहुंच, गुणवत्ता सुधार, तकनीकी उन्नयन और वित्तीय सहायता पर जोर दिया जा रहा है। हाल में Quality Council of India (QCI) और National Small Industries Corporation (NSIC) के बीच हुए समझौते में MSME के लिए गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धात्मकता और बाजार पहुंच को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया है।
घोषणा से आगे प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी
डॉ. कपिल चोपड़ा ने कहा कि किसी भी पहल की वास्तविक सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन से तय होगी। उनके मुताबिक, केवल योजना की घोषणा पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उसका लाभ वास्तविक रूप से छोटे उद्यमियों तक पहुंचे।
उन्होंने कहा, “यह एक अच्छा कदम है, लेकिन इसकी वास्तविक प्रभावशीलता और क्रियान्वयन को देखना जरूरी होगा।”
डॉ. चोपड़ा ने इस बात पर जोर दिया कि छोटे उद्योगों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के दौरान अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े और सहायता की प्रक्रिया सरल एवं समयबद्ध हो।
तकनीकी मार्गदर्शन और गुणवत्ता सुधार पर जोर
उन्होंने कहा कि चयनित उद्योगों को तकनीकी मार्गदर्शन, गुणवत्ता सुधार और बाजार विस्तार के लिए समयबद्ध सहयोग उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इससे उद्यमियों को अपने उत्पादों की गुणवत्ता बेहतर करने और बदलती बाजार जरूरतों के अनुरूप अपने कारोबार को विकसित करने में मदद मिल सकती है।
सरकार की MSME Champion Scheme के तहत भी गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धात्मकता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए ZED Certification तथा LEAN जैसी पहलों को लागू किया जा रहा है।
नए बाजारों तक पहुंच से बढ़ सकते हैं अवसर
डॉ. चोपड़ा के अनुसार, छोटे उद्योगों के लिए केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। उनके उत्पादों के लिए नए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
MSME मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं में व्यापार मेलों, प्रदर्शनियों, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और डिजिटल बाजारों के माध्यम से छोटे उद्यमों की बाजार पहुंच बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि छोटे उद्यमियों को बाजार, तकनीक और वित्त से जुड़ी सहायता एक प्रभावी व्यवस्था के तहत मिलती है, तो इससे उनके कारोबार के विस्तार के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।
नियमित निगरानी को बताया महत्वपूर्ण
डॉ. कपिल चोपड़ा ने योजना के क्रियान्वयन की नियमित निगरानी को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह देखा जाना चाहिए कि निर्धारित सहायता वास्तव में कितने उद्यमियों तक पहुंच रही है और उन्हें इसका व्यावहारिक लाभ मिल रहा है या नहीं।
उन्होंने प्रभावी implementation को इस पहल की सफलता की महत्वपूर्ण कसौटी बताते हुए कहा कि छोटे उद्योगों को मजबूत करने के लिए सरकारी प्रयासों और उद्यमियों की वास्तविक जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।
छोटे एवं मध्यम उद्योगों के लिए बाजार पहुंच, तकनीकी सहयोग और वित्तीय सहायता से जुड़े सरकारी कार्यक्रम पहले से भी संचालित हैं। ऐसे में उनके प्रभावी क्रियान्वयन और जमीनी स्तर तक पहुंच को लेकर उद्योग जगत की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
