औरंगाबाद (बिहार): चेक बाउंस से जुड़े लंबित मामलों के त्वरित और आपसी सहमति से निपटारे के लिए औरंगाबाद में 21 नवंबर 2026 को विशेष लोक अदालत आयोजित की जाएगी। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निर्देश और सर्वोच्च न्यायालय की विशेष पहल के तहत होने वाली इस लोक अदालत में परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के अंतर्गत लंबित मामलों के निष्पादन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ कम करना और संबंधित पक्षकारों को विवाद का समाधान कराने के लिए एक सरल एवं सुलभ अवसर उपलब्ध कराना है। चेक अनादरण से जुड़े मामले आम तौर पर वित्तीय लेन-देन से संबंधित होते हैं। ऐसे मामलों में आपसी समझौते की संभावना को देखते हुए लोक अदालत को विवाद निपटाने का प्रभावी माध्यम माना जाता है।
विशेष लोक अदालत की तैयारी को लेकर न्यायिक पदाधिकारियों की बैठक
विशेष लोक अदालत को सफल बनाने और अधिक से अधिक मामलों का निपटारा सुनिश्चित करने के लिए मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला विधिक सेवा प्राधिकार, औरंगाबाद की सचिव सुश्री तान्या पटेल सहित विभिन्न न्यायिक पदाधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने धारा 138 के तहत लंबित मामलों को विशेष लोक अदालत के माध्यम से निपटाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने संबंधित न्यायिक पदाधिकारियों से अपने-अपने न्यायालयों में लंबित ऐसे मामलों की पहचान कर समय रहते जरूरी कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया, ताकि अधिकाधिक मामलों को इस अवसर का लाभ मिल सके।
उन्होंने यह भी कहा कि मामलों के निष्पादन के लिए पक्षकारों को पहले से तैयार करना जरूरी है। इसके लिए आवश्यकता के अनुसार प्री-काउंसलिंग और समझौता वार्ता आयोजित करने पर जोर दिया गया, जिससे विवाद सुलझाने में आ रही परेशानियों को दूर किया जा सके और दोनों पक्ष आपसी सहमति से समाधान की दिशा में आगे बढ़ें।
पक्षकारों को भेजे जाएंगे नोटिस
जिला विधिक सेवा प्राधिकार, औरंगाबाद की सचिव सुश्री तान्या पटेल ने बताया कि न्यायालयों से प्राप्त लंबित मामलों की सूची के आधार पर संबंधित पक्षकारों को नोटिस भेजने समेत आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि विशेष लोक अदालत की सफलता के लिए संबंधित लोगों तक समय पर सूचना पहुंचाना और उन्हें समझौते के जरिए विवाद सुलझाने के लिए प्रेरित करना महत्वपूर्ण है। इसके लिए आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं, ताकि निर्धारित तिथि पर अधिक से अधिक मामलों का निष्पादन संभव हो सके।
सचिव ने आम नागरिकों और संबंधित पक्षकारों से अपील की कि यदि चेक बाउंस से जुड़ा उनका कोई मामला किसी न्यायालय में लंबित है, तो वे इसकी जानकारी जिला विधिक सेवा प्राधिकार, औरंगाबाद को उपलब्ध कराएं। जरूरत के अनुसार प्री-काउंसलिंग में शामिल हों और 21 नवंबर को आयोजित विशेष लोक अदालत में उपस्थित होकर समझौते के माध्यम से मामले के निपटारे की पहल करें।
समय और खर्च बचाने का मिलेगा अवसर
विशेष लोक अदालत का एक प्रमुख उद्देश्य पक्षकारों को लंबे समय तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया से राहत दिलाने का अवसर देना है। आपसी सहमति से विवाद का समाधान होने पर संबंधित लोगों के समय और धन की बचत हो सकती है। साथ ही, न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या कम करने में भी मदद मिल सकती है।
हालांकि, मामलों का निपटारा संबंधित पक्षकारों की सहमति और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार ही होगा। इसलिए जिन लोगों के मामले धारा 138 के तहत लंबित हैं, उनके लिए समय रहते संबंधित प्राधिकार से संपर्क करना उपयोगी रहेगा।
बैठक में कई न्यायिक पदाधिकारी रहे मौजूद
बैठक में अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी डॉ. दीवान फहद खान, प्रदीप चंद्रा, संदीप कुमार सिंह, अनुमंडलीय न्यायिक दंडाधिकारी अनीश कुमार, न्यायिक पदाधिकारी अभय सिंह, प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी श्रीमती प्रेरणा सिंह, सूरज प्रकाश, श्रीमती गीतांजलि, कुमार अभिजीत राय, श्रीमती निकिता राज और सुश्री शिवांगी सहित अन्य न्यायिक पदाधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में मौजूद सभी न्यायिक पदाधिकारियों ने विशेष लोक अदालत को सफल बनाने के लिए अपने स्तर से आवश्यक पहल करने और धारा 138 के तहत लंबित अधिकाधिक मामलों के निपटारे में सक्रिय सहयोग देने का आश्वासन दिया।
चेक बाउंस का मामला लंबित रखने के बजाय आपसी सहमति से समाधान तलाशने के इच्छुक पक्षकारों के लिए 21 नवंबर 2026 की विशेष लोक अदालत एक महत्वपूर्ण अवसर होगी।
रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय.
