देश में कथित NEET-UG 2026 पेपर लीक को लेकर सियासत लगातार गरमाती जा रही है। शुक्रवार सुबह लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि छात्रों की सबसे बड़ी मांग पर जवाब देने के बजाय सरकार सिर्फ बयानबाज़ी कर रही है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री की देर रात जारी वीडियो प्रतिक्रिया को लेकर कहा कि छात्रों की समझ को कम मत आंकिए और उनकी भावनाओं का सम्मान कीजिए।
यह बयान ऐसे समय आया है जब परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता, छात्रों का भविष्य और सरकार की जवाबदेही पूरे देश में बहस का बड़ा मुद्दा बने हुए हैं।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच X पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीडियो संदेश की आलोचना करते हुए कहा कि छात्र लगातार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार इस मूल सवाल से बच रही है।
उन्होंने अपनी पोस्ट में तीन प्रमुख मांगें रखीं—
1. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाए।
राहुल गांधी का कहना है कि जब लाखों छात्रों का भरोसा परीक्षा व्यवस्था से उठ रहा है, तब राजनीतिक जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
2. प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कार्रवाई करने वालों के खिलाफ कदम उठाया जाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस की सख्ती चिंता का विषय है और इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
3. छात्रों से माफी मांगी जाए।
राहुल गांधी का कहना है कि सरकार को छात्रों की नाराज़गी समझनी चाहिए और उनकी चिंताओं का सम्मान करना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने देर रात क्या ऐलान किया?
राहुल गांधी की प्रतिक्रिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस वीडियो संदेश के बाद आई जिसमें उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाएं लाखों छात्रों और उनके परिवारों के लिए बेहद पीड़ादायक होती हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार का पहला लक्ष्य यह था कि छात्रों का पूरा शैक्षणिक वर्ष बर्बाद न हो। इसी कारण कम समय में लगभग 22 लाख छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा आयोजित कराई गई और परिणाम भी घोषित किए गए।
सरकार की नई योजना क्या है?
प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार अब परीक्षा पेपर लीक जैसे मामलों के खिलाफ और सख्त कानूनी व्यवस्था लाने जा रही है।
प्रस्तावित कानून में शामिल हो सकते हैं—
फास्ट ट्रैक कोर्ट
पेपर लीक से जुड़े मामलों की जल्द सुनवाई के लिए विशेष अदालतों की व्यवस्था।
कड़ी सज़ा
ऐसे अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ पहले से अधिक कठोर दंड का प्रावधान।
संसद में नया विधेयक
प्रधानमंत्री ने कहा कि मसौदे पर केंद्रीय मंत्रिमंडल में चर्चा के बाद इसे संसद के आगामी सप्ताह में पेश किया जाएगा।
विपक्ष क्यों नहीं मान रहा सरकार का जवाब?
विपक्षी दलों का कहना है कि केवल नया कानून लाना पर्याप्त नहीं है। उनका तर्क है कि जब तक जिम्मेदारी तय नहीं होगी, तब तक छात्रों का विश्वास वापस नहीं आएगा।
मानसून सत्र के दौरान भी विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करता रहा है। यह मुद्दा संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक टकराव का कारण बना हुआ है।
सोनम वांगचुक ने खत्म किया अनशन
इसी बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना 26 दिन लंबा अनशन समाप्त कर दिया।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के मंत्रियों के साथ लंबी बातचीत और देश में किसी भी तरह की हिंसा की आशंका को देखते हुए उन्होंने यह फैसला लिया। उन्होंने लोगों से शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने की अपील भी की।
छात्रों का मुद्दा अब राजनीतिक बहस का केंद्र
पेपर लीक विवाद अब केवल परीक्षा तक सीमित नहीं रहा। यह छात्रों के भविष्य, सरकारी जवाबदेही और परीक्षा प्रणाली में सुधार जैसे बड़े सवालों से जुड़ चुका है।
एक ओर केंद्र सरकार सख्त कानून और तेज़ न्यायिक प्रक्रिया की बात कर रही है, वहीं विपक्ष जवाबदेही तय करने और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है। आने वाले दिनों में संसद में पेश होने वाला प्रस्तावित विधेयक और इस पूरे मामले पर सरकार का अगला कदम तय करेगा कि यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।
रिपोर्ट : इस्मा टाइम्स न्यूज़ डेस्क.
