औरंगाबाद (बिहार) : मंगलवार 21 जुलाई 2026 को जिला मुख्यालय औरंगाबाद में तीन लोगों ने मिलकर एक नेपाली महिला के साथ गैंगरेप किया। इस दुष्कर्म में दो आरोपी वयस्क हैं और एक नाबालिग है। तीनों ही महुआ शहीद, वार्ड नंबर 29 के रहने वाले हैं।
आरोपियों के नाम और पेशा
वयस्क आरोपियों में एक का नाम जीतू उर्फ पाली है और दूसरे का नाम अभिषेक कुमार है। दोनों ऑटो चलाते हैं। तीसरा आरोपी नाबालिग है।
पीड़िता का बयान
पीड़िता ने पुलिस को बताया कि नाबालिग आरोपी ने उसके छोटे बच्चों को घुमाने का बहाना बनाकर उसे भी साथ चलने को कहा। वह अपने दो छोटे बच्चों के साथ चली गई। रास्ते में उन्हें थ्री व्हीलर यानी टेम्पो में बैठाया गया, जिसमें जीतू उर्फ पाली और अभिषेक कुमार पहले से बैठे थे।
घटना का विवरण
तीनों आरोपी उन्हें बाजार घुमाने के बाद सिंचाई कॉलोनी स्थित एक खंडहरनुमा मकान में ले गए। वहां उन्होंने महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। जब वह विरोध करने लगी तो आरोपियों ने मिलकर उसके साथ मारपीट भी की। बच्चों का ध्यान भटकाने के लिए उन्हें मोबाइल फोन दे दिया गया था। यह घटना मंगलवार देर शाम की बताई जा रही है।
घटना के बाद
घटना के बाद आरोपियों ने पीड़िता को नगर थाना के पास पानी टंकी के समीप छोड़कर फरार हो गए। रात में पीड़िता ने अपने पति को सारी बात बताई। अगले दिन बुधवार 22 जुलाई 2026 को पति के साथ नगर थाने पहुंचकर उसने लिखित शिकायत दर्ज कराई और तीनों आरोपियों की पहचान भी बताई।
पुलिस की कार्रवाई
शिकायत के आधार पर पुलिस ने छापेमारी कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। माननीय अदालत के आदेश पर दोनों वयस्क आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया, जबकि नाबालिग को बाल न्याय प्रणाली के तहत प्लेस ऑफ सेफ्टी में भेजा गया है। पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया और उसका बयान भी अदालत में दर्ज कराया।
पीड़िता परिवार की स्थिति
पीड़िता के पति ने बताया कि वे परिवार के साथ औरंगाबाद शहर में किराए के मकान में रहते हैं। वह रोज नींबू मसाला वाली चाय बनाकर बेचता है और उसी से परिवार का गुजारा चलता है।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
वार्ड नंबर 29 के ही एक स्थानीय निवासी ने बताया कि अब समझ में नहीं आता कि संस्कार कहां चले गए। एक ही मोहल्ले के लोग अपने पड़ोसियों के साथ ऐसा घिनौना काम कर रहे हैं। न तो अपनी इज्जत का ख्याल है न मोहल्ले की बदनामी का। सूत्र ने आगे कहा कि इन तीनों को कठोर से कठोर सजा मिलनी चाहिए, ताकि ऐसे काम करने से पहले लोग कई बार सोचें और आम लोगों में भय पैदा हो।
रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय.
