औरंगाबाद, बिहार | 20 सितंबर 2026: मां मुंडेश्वरी ग्रुप ऑफ कंपनीज के चेयरमैन, बिहार भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य और समाजसेवी गोपाल शरण सिंह की ओर से आयोजित किसान सम्मान समारोह सह ‘एक पेड़ मां के नाम’ पौधा वितरण कार्यक्रम में मगध क्षेत्र के आईजी विकास वैभव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
कार्यक्रम का उद्घाटन विकास वैभव ने मंच पर मौजूद गणमान्य लोगों के साथ पारंपरिक तरीके से फीता काटकर और दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए किसान सम्मान, पर्यावरण संरक्षण, मगध के इतिहास और बिहार के विकास से जुड़े कई मुद्दों पर अपने विचार रखे।
16 वर्षों से हो रहे आयोजन की सराहना
विकास वैभव ने गोपाल शरण सिंह की ओर से लगातार 16 वर्षों से किसान सम्मान समारोह आयोजित किए जाने की सराहना की। उन्होंने कहा कि किसी कार्यक्रम को शुरू करना और लगातार वर्षों तक उसे आगे बढ़ाना आसान नहीं होता।
उन्होंने कहा कि पहले यह आयोजन छोटे स्तर पर होता था, लेकिन अब इसमें बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी हो रही है। उन्होंने भविष्य में कार्यक्रम को और बड़े स्तर पर आयोजित करने के संकल्प के लिए आयोजक को शुभकामनाएं दीं।

‘मगध केवल एक नाम नहीं, गौरवशाली इतिहास है’
अपने संबोधन में विकास वैभव ने मगध के प्राचीन इतिहास और उसके गौरव का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ‘मगध’ नाम सुनते ही गौरव और प्राचीन विरासत का भाव मन में आता है।
उन्होंने प्राचीन मगध की सैन्य शक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐतिहासिक विवरणों में बड़ी संख्या में घुड़सवारों, हाथियों और रथों वाली सेना का वर्णन मिलता है। उन्होंने कहा कि मगध की शक्ति और प्रभाव का उल्लेख प्राचीन इतिहास में भी मिलता है।
विकास वैभव ने महाभारत के जरासंध प्रसंग का उल्लेख करते हुए मगध की ऐतिहासिक शक्ति और राजगीर के महत्व की चर्चा की। उन्होंने कहा कि मगध केवल सैन्य शक्ति के लिए ही नहीं, बल्कि ज्ञान, उद्यमिता और सांस्कृतिक विरासत के लिए भी जाना जाता रहा है।
नालंदा, बुद्ध और कौटिल्य की विरासत का किया उल्लेख
विकास वैभव ने कहा कि मगध ज्ञान की भूमि रही है, जहां नालंदा में दुनिया के विभिन्न हिस्सों से लोग शिक्षा ग्रहण करने आते थे। उन्होंने भगवान बुद्ध से जुड़े बोधगया के महत्व का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कौटिल्य और प्राचीन पाटलिपुत्र का संदर्भ देते हुए कहा कि मगध का इतिहास शासन, व्यापार, शिक्षा और उद्यमिता की समृद्ध परंपरा से जुड़ा रहा है।
उन्होंने कहा कि ऐसी ऐतिहासिक विरासत वाले क्षेत्र के लोगों को अपने अतीत पर गर्व करने के साथ वर्तमान और भविष्य के विकास के लिए भी काम करना चाहिए।
बिहार के विकास को लेकर चिंता जताई
विकास वैभव ने अपने संबोधन में बिहार की वर्तमान आर्थिक स्थिति को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने विभिन्न राज्यों की प्रति व्यक्ति आय के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बिहार में आय और विकास से जुड़ी चुनौतियों की चर्चा की।
हालांकि, उनके भाषण में बताए गए कुछ आय संबंधी आंकड़े उपलब्ध बिहार सरकार के वर्तमान सांख्यिकीय आंकड़ों से अलग हैं। बिहार सरकार के आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय के अनुसार 2024-25 में बिहार की प्रति व्यक्ति आय ₹69,321 थी। इसलिए मंच से बताए गए आंकड़ों को विकास वैभव के वक्तव्य के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
उन्होंने बिहार की बड़ी युवा आबादी का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य के विकास के लिए युवाओं की क्षमता और ऊर्जा का बेहतर इस्तेमाल जरूरी है।
‘बिहार का अपमान नहीं सहूंगा’ से जुड़ा अनुभव साझा किया
विकास वैभव ने अपने व्यक्तिगत जीवन का अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके पिता भोपाल में नौकरी करते थे और बाहर पढ़ाई के दौरान उन्हें ‘बिहारी’ कहकर संबोधित किया जाता था।
उन्होंने कहा कि बाद में उन्हें महसूस हुआ कि कई लोग ‘बिहारी’ शब्द का इस्तेमाल अपमानजनक नजरिये से करते हैं। उन्होंने बताया कि नौवीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने बिहार की छवि और स्थिति को बदलने का संकल्प लिया था।
उन्होंने अपने आईआईटी में चयन और बाद में सिविल सेवा में जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अपने संकल्प को आगे बढ़ाने के लिए आईपीएस सेवा का रास्ता चुना। उपलब्ध जीवनी संबंधी जानकारी के अनुसार विकास वैभव 2003 बैच के बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं और आईआईटी कानपुर से पढ़ाई कर चुके हैं।

रोहतास, बगहा और औरंगाबाद में सेवा का किया जिक्र
विकास वैभव ने कहा कि आईपीएस बनने के बाद उन्होंने रोहतास, बगहा और औरंगाबाद समेत बिहार के कई क्षेत्रों में काम किया। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान देखी गई चुनौतियों और बाद में आए बदलावों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि बदलाव संभव है, लेकिन इसके लिए सकारात्मक सोच और ईमानदार प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने लोगों से जाति आधारित बहस से आगे बढ़कर ईमानदारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और विकास जैसे मुद्दों पर ध्यान देने की अपील की।
गांवों के विकास पर दिया जोर
विकास वैभव ने कहा कि यदि प्रत्येक गांव में विद्यालय, अस्पताल, स्वच्छता, पौधारोपण और अन्य बुनियादी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जाए तो व्यापक बदलाव संभव है।
उन्होंने अपने ‘लेट्स इंस्पायर बिहार’ अभियान का भी उल्लेख किया। यह पहल शिक्षा, समता और उद्यमिता के माध्यम से बिहार के विकास को लेकर काम करने का दावा करती है।
उन्होंने कहा कि सकारात्मक सोच के साथ समाज के अलग-अलग वर्गों को विकास के लिए मिलकर काम करना होगा।
पेपर लीक को लेकर जताई चिंता
अपने संबोधन में विकास वैभव ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पेपर लीक की समस्या उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी प्रभावित करती है, क्योंकि उनके समय में भी एक बार पेपर लीक हुआ था।
उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद जरूरी है।
‘मगध जाग गया तो निश्चित इतिहास लिखा जाएगा’
विकास वैभव ने बताया कि वे अपने कार्यालय में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोगों से मिलते हैं और उनकी समस्याओं को सुनते हैं। उन्होंने कहा कि जनसमस्याओं को समझने और समाधान की दिशा में प्रयास करना जरूरी है।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि यदि मगध जाग गया तो निश्चित रूप से नया इतिहास लिखा जाएगा। उन्होंने लोगों से मगध के गौरवशाली इतिहास को याद रखने के साथ गांव-गांव के विकास में भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि इतिहास की विरासत को वर्तमान की जिम्मेदारी से जोड़कर आगे बढ़ने की जरूरत है।
रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय.
