गया, बिहार | 24 सितंबर 2026: आयुर्वेद रक्षा एवं विकास संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विवेकानंद मिश्र ने आयुर्वेद को प्राचीन भारतीय चिकित्सा परंपरा की महत्वपूर्ण धरोहर बताते हुए इसके संरक्षण और विकास की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि समस्त प्राणियों के स्वास्थ्य और कल्याण से जुड़ा चिकित्सा विज्ञान है।
वे गुरुवार को स्थानीय गोल बगीचा स्थित डॉ. विवेकानंद पथ पर आयोजित आयुर्वेद दिवस समारोह के शुभारंभ के अवसर पर संबोधित कर रहे थे।
आयुर्वेद के विकास पर जताई चिंता
डॉ. विवेकानंद मिश्र ने आयुर्वेद के प्रति सरकारी स्तर पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिए जाने को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के इतने वर्षों बाद भी आम लोगों तक स्वास्थ्य योजनाओं का अपेक्षित लाभ पहुंचाने की चुनौती बनी हुई है।
उन्होंने आयुर्वेद की पहुंच, सरलता और पारंपरिक उपचार पद्धतियों का उल्लेख करते हुए इसके संरक्षण और विस्तार की आवश्यकता बताई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी उदासीनता और विभिन्न प्रकार के व्यावसायिक हितों के कारण आयुर्वेद को वह स्थान नहीं मिल पा रहा है, जिसकी वह अपेक्षा करते हैं।
डॉ. मिश्र ने चिकित्सा क्षेत्र में बढ़ते व्यावसायीकरण पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा का उद्देश्य लोगों को बेहतर चिकित्सा उपलब्ध कराना होना चाहिए।
आयुर्वेद के मूल्यों को पुनर्स्थापित करने पर जोर
कार्यक्रम में आचार्य सच्चिदानंद मिश्र ने आयुर्वेद की ऐतिहासिक परंपरा और इसके गौरवशाली अतीत का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में आयुर्वेद के मूल्यों और महत्व को लोगों तक पहुंचाने के लिए व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम चलाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि जनजागरूकता के माध्यम से आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के बारे में लोगों को जानकारी दी जा सकती है, जिससे गांवों से लेकर शहरों तक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और पहुंच पर चर्चा को आगे बढ़ाया जा सके।
स्वास्थ्य सेवा में जागरूकता को बताया जरूरी
समारोह में वक्ताओं ने आयुर्वेद से जुड़े विषयों पर जनजागरूकता बढ़ाने, पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान को संरक्षित करने और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को बेहतर बनाने की आवश्यकता पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम के दौरान आयुर्वेद दिवस के उद्देश्य और भारतीय चिकित्सा परंपरा में आयुर्वेद की भूमिका को लेकर भी चर्चा हुई।
बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद
समारोह में डॉ. पी. मिश्रा, संदीप मिश्रा, शंभू गुर्दा, राजीव लाल, हरि नारायण त्रिपाठी, सुरेंद्र दुबे, प्रोफेसर सुनील कुमार, डॉ. छोटे बाबू, विश्वजीत चक्रवर्ती, संतोष कुमार पाठक, डॉ. जितेंद्र मिश्र, अपराजिता मिश्रा, डॉ. संदीप अवस्थी, अच्युत अनंत मराठे, अनुपम मिश्रा, डॉ. गीता विश्वकर्मा, डॉ. अकेला, डॉ. विनोद कुमार मिश्रा, डॉ. अजीत कुमार मिश्रा, राखी कुमारी, राजेश त्रिपाठी, शंभू गिरी, जितेंद्र मिश्रा, अशोक दुबे, सत्येंद्र दुबे, पवन मिश्रा, मोहम्मद याहिया, पूनम कुमारी, डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा, डॉ. सुरेंद्र प्रसाद, डॉ. अमरेंद्र प्रसाद, डॉ. ज्ञानेश भारद्वाज, दीपक पाठक, विनोद तिवारी, राजकुमार यादव, शीला जायसवाल, अजय मिश्रा, सुनील कुमार, डॉ. दिनेश कुमार सिंह, डॉ. रविंद्र कुमार, मनीष कुमार, डिंपल कुमारी, मेघा मिश्रा, रंजना पांडे, ए. नीरज वर्मा, दिलीप कुमार, शिवाजी, कुंदन कुमार मिश्रा, नीरज मिश्रा, रणजीत मिश्रा, डॉ. मृदुला मिश्रा, डॉ. ज्ञानेश, सविता कुमारी, पार्वती देवी भारद्वाज, रंजीत पाठक, नुसरत जहां, रेशमा परवीन, हरिद्वार मिश्रा, शारदा साहिब और पुष्पा कुमारी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम में आयुर्वेद के संरक्षण, जनजागरूकता और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
रिपोर्ट : विश्वनाथ आनंद.
