देवघर, झारखंड: राष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था शब्दवीणा की झारखंड प्रदेश समिति और देवघर जिला समिति के संयुक्त तत्वावधान में गोस्वामी तुलसीदास की स्मृति में एक दिवसीय साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम देवघर स्थित अटल लैंग्वेज लैब में हुआ, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ कथाकार प्रशांत कुमार सिन्हा ने की।
कार्यक्रम की शुरुआत गोस्वामी तुलसीदास के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। इसके बाद शिक्षक नन्दन रामपुरी ने विनय-पत्रिका के प्रथम पद ‘गाइए गणपति जग वंदन’ की प्रस्तुति दी। वहीं छात्रा माही और छात्र शुभम ने सस्वर श्रीहनुमान चालीसा का पाठ किया।
संगोष्ठी में बच्चों और नवोदित रचनाकारों की भागीदारी भी देखने को मिली। नवोदित कवयित्री श्रीठाकुर ने अपने विचार रखे। छात्र शुभम ने महाकाल पर अपनी स्वरचित कविता प्रस्तुत की, जबकि माही ने गुरु की महिमा पर अपने विचार साझा किए।
तुलसीदास के साहित्यिक योगदान पर हुई चर्चा
शब्दवीणा के देवघर जिला प्रचार मंत्री धीरेन्द्र छतहारवाला ने कविता के माध्यम से गोस्वामी तुलसीदास के जीवन और उनकी प्रमुख कृतियों पर प्रकाश डाला। देवघर जिला सचिव डॉ. परशुराम तिवारी ने तुलसीदास और रामचरितमानस को अमूल्य साहित्यिक धरोहर बताते हुए उनके महत्व पर अपने विचार रखे।
शब्दवीणा झारखंड प्रदेश समिति के प्रवक्ता और वरिष्ठ कवि अनिल कुमार झा ने तुलसीदास के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने अपनी रचना ‘तुलसी बाबा फिर से आओ’ का सस्वर गायन भी किया। इस दौरान उन्होंने तुलसीदास के साहित्यिक जीवन को 108 बंदों के माध्यम से प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का संयोजन और समन्वयन शब्दवीणा झारखंड प्रदेश अध्यक्ष, देवघर जिला समिति के संरक्षक तथा अटल लैंग्वेज लैब के संचालक डॉ. विजय शंकर ने किया। उन्होंने तुलसीदास की साहित्यिक विरासत, श्रीरामचरितमानस की गरिमा और देवघर की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान पर अपने विचार रखे।
बच्चों की सहभागिता को सराहा गया
संगोष्ठी में शिक्षक राजकमल दुबे ने कहा कि तुलसीदास की रचनाएं पाठकों को उनके बचपन की स्मृतियों से जोड़ देती हैं। समीक्षक आर. के. ठाकुर ने कार्यक्रम की सार्थकता के साथ बच्चों की सक्रिय भागीदारी की भी सराहना की।
कार्यक्रम में इतिहासकार प्रसन्न चौधरी की भी गरिमामय मौजूदगी रही। अध्यक्षीय संबोधन में वरिष्ठ कथाकार प्रशांत कुमार सिन्हा ने कहा कि शब्दवीणा की ओर से आयोजित यह कार्यक्रम रामभक्त कवि तुलसीदास के प्रति सम्मान और श्रद्धा व्यक्त करने का एक माध्यम है।
इस अवसर पर कवयित्री श्रीठाकुर को श्रीरामचरितमानस की मूल प्रति के साथ उसका हिंदी अनुवाद भी भेंट किया गया।
आयोजन को सफल बनाने में मधुलिका शंकर, शंभु मिश्रा, माही, गजानन समेत मौजूद सभी अतिथियों और सहयोगियों की भूमिका रही। कार्यक्रम के समापन पर शब्दवीणा की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रश्मि प्रियदर्शनी, देवघर जिला समिति की अध्यक्ष सोनाली भारती, जिला उपाध्यक्ष डॉ. इति कुमारी, जिला संगठन मंत्री श्रवण सहस्त्रांशु, जिला कोषाध्यक्ष बबन बदिया और जिला साहित्य मंत्री सोनम झा ने झारखंड प्रदेश समिति एवं देवघर जिला समिति को अपनी शुभकामनाएं दीं।
रिपोर्ट : विश्वनाथ आनंद.
