गया (बिहार), 2 सितंबर 2026: गया जी स्थित गौतम बुद्ध महिला महाविद्यालय के सावित्री महाजन सभागार में दर्शनशास्त्र विभाग की ओर से ‘गुरु-शिष्य परंपरा’ विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के तत्वावधान में किया गया।
कार्यक्रम में प्रख्यात वक्ता आचार्य नवीन जी ने भारतीय संस्कृति और दर्शन में गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में गुरु का स्थान बेहद सम्मानित रहा है और गुरु केवल शिक्षा देने वाले व्यक्ति नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा दिखाने वाले मार्गदर्शक भी माने जाते हैं।
व्याख्यान के दौरान उन्होंने भारतीय संस्कृति में गुरु के प्रति सम्मान की परंपरा का उल्लेख करते हुए छात्राओं को माता-पिता और गुरुजनों के प्रति श्रद्धा एवं सम्मान का भाव बनाए रखने की सलाह दी।
कार्यक्रम में प्रभारी प्रधानाचार्य डॉ. सहदेब बाउरी के अलावा दर्शनशास्त्र विभाग की फैकल्टी डॉ. जया चौधरी, डॉ. पूजा राय, डॉ. अमृता कुमारी घोष और डॉ. आशुतोष कुमार पांडे सहित महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक एवं छात्राएं मौजूद रहीं।
महाविद्यालय की पीआरओ डॉ. रश्मि प्रियदर्शनी ने बताया कि यह व्याख्यान आगामी 5 सितंबर को मनाए जाने वाले शिक्षक दिवस को ध्यान में रखते हुए आयोजित किया गया था। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में छात्राओं ने काफी रुचि और एकाग्रता के साथ भाग लिया।
छात्राओं को प्रदान किए गए प्रमाण-पत्र
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को जीवन विद्या द्वारा संचालित 40 घंटे के ‘रिफ्लेक्शन ऑन वैल्यूज’ पाठ्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए प्रमाण-पत्र भी दिए गए।
बताया गया कि इन प्रमाण-पत्रों के लिए विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति और निर्धारित असाइनमेंट को सफलतापूर्वक पूरा करना जरूरी था। तय मानदंडों को पूरा करने वाले विद्यार्थियों को कार्यक्रम के दौरान प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।
प्रभारी प्रधानाचार्य डॉ. सहदेब बाउरी ने छात्राओं को प्रमाण-पत्र देते हुए उन्हें मेहनत और लगन के साथ पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने छात्राओं से भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल्यों और आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का भी आह्वान किया।
कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं को शिक्षा के साथ-साथ गुरुजनों के प्रति सम्मान, जीवन-मूल्यों और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ने का संदेश दिया गया।
रिपोर्ट : विश्वनाथ आनंद.
