इंफ़ाल की सड़कों पर जन-सैलाब
31 अक्तूबर 2026, शनिवार को मणिपुर की राजधानी इंफ़ाल में हज़ारों लोग सड़कों पर उतर आए। यह विशाल रैली Coordinating Committee on Manipur Integrity यानी COCOMI और उससे जुड़ी कई नागरिक समाज की संस्थाओं ने आयोजित की थी। रैली Tiddim Ground, Kwakeithel से शुरू होकर Thau Ground, Thangmeiband में जन-सभा पर ख़त्म हुई।
यह महज़ एक सियासी प्रदर्शन नहीं था। इसमें घाटी और पहाड़ी इलाक़ों की कई बिरादरियों के लोग शामिल हुए। मक़सद साफ़ था—लंबे तक़रार का ख़ात्मा, पीड़ितों को इंसाफ़, बेघर हुए लोगों की सुरक्षित वापसी और राज्य की सलामती का इंतज़ाम।
‘Save Manipur’ और ‘We Want Peace and Justice’
प्रदर्शनकारियों के हाथों में पोस्टर, बैनर और प्लेकार्ड थे, जिन पर ‘Save Manipur’, ‘We want peace and justice’ और ‘Abrogate SoO’ जैसे नारे लिखे गए थे। कुछ प्लेकार्डों पर यह भी लिखा गया कि लोग जंग नहीं, अमन चाहते हैं और सरकार से जान-माल की हिफ़ाज़त की ज़िम्मेदारी निभाने की माँग की गई।
एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि लोगों ने बहुत दुख, जानों के नुक़सान और संपत्ति की तबाही झेल ली है; अब उन्हें पक्का अमन और इंसाफ़ चाहिए। यही एहसास पूरी रैली का केंद्रीय पैग़ाम बन गया।
मुख्यमंत्री के इस्तीफ़े की माँग क्यों?
प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री युमनम खेमचंद सिंह से इस्तीफ़े की माँग इसलिए की कि वे सरकार को तक़रार, आम नागरिकों की हत्या, अपहरण, आगज़नी और बेघरगी के लगातार वाक़ियात रोकने में नाकाम समझते हैं। हाल में कांगपोकपी ज़िले में लकड़ी इकट्ठा करने गए तीन मेइती नागरिकों की हत्या के बाद यह ग़ुस्सा और तेज़ हो गया था।
अक्तूबर के दौरान इंफ़ाल के मुख़्तलिफ़ हिस्सों में महिला दुकानदारों और शहरियों ने भी मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन और दूसरे अफ़सरों से इस्तीफ़े की माँग की थी। कांग्रेस ने भी मुख्यमंत्री के इस्तीफ़े, विधानसभा भंग करने और नए चुनाव की माँग की है।
SoO समझौता क्या है और एतराज़ क्यों?
Suspension of Operations, यानी SoO, सरकार और कुछ सशस्त्र गिरोहों के दरमियान एक अमन-एहद है, जिसके तहत एक-दूसरे के ख़िलाफ़ कार्रवाई रोकी जाती है। मणिपुर में यह समझौता ख़ास तौर पर कुकी सशस्त्र गिरोहों से मुताल्लिक़ है।
प्रदर्शनकारियों का मौक़िफ़ है कि इस समझौते का फ़ायदा सशस्त्र गिरोह उठा रहे हैं, जबकि आम लोग तक़रार, अपहरण और जला-बसा का शिकार हो रहे हैं। इसी लिए COCOMI और कई नागा संगठनों ने SoO समझौते की फ़ौरी रद्दी की माँग की।
प्रदर्शन की बड़ी माँगें
- SoO समझौते की फ़ौरी रद्दी।
- तक़रार से मुतासिर हुए सभी बेघर लोगों की सुरक्षित और वाजिब वापसी।
- पीड़ितों को इंसाफ़ और ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई।
- मुख्यमंत्री युमनम खेमचंद सिंह का इस्तीफ़ा।
- विवादित इलाक़ों से Assam Rifles को निकालने या बदलने की माँग।
- गुवाहाटी समझौते की मुकम्मल अमलदारी।
सेनापति में भी समानंतर प्रदर्शन
यह इहतिजाज़ सिर्फ़ इंफ़ाल तक महदूद नहीं रहा। सेनापति ज़िले में नागा संगठनों ने भी बड़ी रैली निकाली और SoO समझौते के ख़ात्मे, मुतासिर इलाक़ों से Assam Rifles की जगह ग़ैर-ज़ातिपरस्त फ़ौजी दस्तों की तैनाती और उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन के इस्तीफ़े की माँग की।
दोनों तरफ़ के प्रदर्शनों में सियासी और बिरादरी मफ़ाद मुख़्तलिफ़ हो सकते हैं, मगर बुनियादी माँग एक ही है: तक़रार ख़त्म हो, आम शहरी महफ़ूज़ हों और सरकार अपनी ज़िम्मेदारी अदा करे।
सरकार का मौक़िफ़
मुख्यमंत्री युमनम खेमचंद सिंह ने उसी दिन राष्ट्रीय एकता दिवस के मौक़े पर कहा कि किसी एक बिरादरी को तरजीह देकर मणिपुर पर हुकूमत नहीं की जा सकती। उन्होंने बिरादरी-परस्त सोच से आगे बढ़ने, राज्य की सलामती, अमन और माली तरक़्क़ी के लिए मुश्तरका कोशिश की अपील की।
संपादकीय नज़र
यह वाक़िया इस बात की गवाही देता है कि मणिपुर का संकट अब सिर्फ़ क़ानून-व-व्यवस्था का मसला नहीं रहा; यह ऐतमाद, जवाबदेही और इंसानी हिफ़ाज़त का सवाल बन चुका है। प्रदर्शनकारियों की माँग गो-महल सियासी है, मगर उनकी बुनियादी बात यह है कि अमन के एलान और ज़मीनी हक़ीक़त के दरमियान जो फ़ासला है, उसे मिटाना सरकार की बुनियादी ज़िम्मेदारी है।
रिपोर्ट : इस्मा टाइम्स न्यूज़ डेस्क.
