बिहार, 25 अक्टूबर 2026। समाज में बढ़ते अन्याय, भ्रष्टाचार, नफरत और भेदभाव के बीच इंसानियत को बचाए रखना बेहद जरूरी है। इंसान की असली पहचान उसकी जाति, धर्म, दौलत या पद से नहीं, बल्कि उसके विचारों और कर्मों से होती है। यह बात सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद जफर बारी अंसारी उर्फ छोटू मियां ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कही।
टिकारी निवासी मोहम्मद जफर बारी अंसारी ने कहा कि आज भी अन्याय, अत्याचार, भ्रष्टाचार और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसी घटनाएं समाज को शर्मसार कर रही हैं। वहीं, गरीबी, बेरोजगारी और महंगाई आम लोगों की जिंदगी को मुश्किल बना रही हैं। धर्म, जाति, भाषा, क्षेत्र और धर्मस्थलों के नाम पर होने वाले विवादों के कारण समाज में आपसी दूरियां बढ़ती दिखाई देती हैं।
नफरत के दौर में इंसानियत और भाईचारा जरूरी
मोहम्मद जफर बारी अंसारी ने कहा कि इंसान को इंसान से जोड़ने वाली सबसे बड़ी ताकत मोहब्बत, आपसी सम्मान और इंसानियत है। प्रकृति ने सभी इंसानों को भूख, दर्द, आंसू और भावनाओं का एहसास दिया है। ऐसे में धर्म, जाति, भाषा और क्षेत्र के आधार पर नफरत फैलाने का कोई औचित्य नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि दुनिया नफरत और स्वार्थ के सहारे नहीं, बल्कि प्रेम, सहयोग और एक-दूसरे की मदद से आगे बढ़ सकती है। समाज में शांति और भाईचारा बनाए रखने के लिए हर व्यक्ति को अपने व्यवहार और विचारों पर ध्यान देने की जरूरत है।
राजनीति का उद्देश्य जनसेवा होना चाहिए
सामाजिक कार्यकर्ता ने राजनीति की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राजनीति का मूल उद्देश्य समाज और देश की सेवा करना होना चाहिए, लेकिन कई बार सत्ता, पद, प्रतिष्ठा और निजी स्वार्थ को जनहित से अधिक महत्व दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि गरीबों, किसानों, छात्रों, बेरोजगार युवाओं और महिलाओं की समस्याओं को गंभीरता से सुनना और उनके समाधान के लिए काम करना जरूरी है। जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा की जाती है कि वे समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के हितों को प्राथमिकता दें।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि समाज में आज भी अनेक लोग बिना किसी स्वार्थ के जनसेवा में जुटे हुए हैं। ऐसे लोगों के प्रयास समाज में उम्मीद और सकारात्मक बदलाव की संभावना बनाए रखते हैं।
अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना हर नागरिक की जिम्मेदारी
मोहम्मद जफर बारी अंसारी ने कहा कि अन्याय देखकर चुप रहना, गलत को गलत कहने से डरना और निजी स्वार्थ के लिए सच्चाई का साथ छोड़ देना समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
उनके अनुसार, जिस दिन लोगों का जमीर जाग जाएगा, उस दिन अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने वालों की कमी नहीं रहेगी। समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए जरूरी है कि लोग सच का साथ दें, पीड़ितों की मदद करें और गलत कार्यों के खिलाफ शांतिपूर्ण एवं जिम्मेदार तरीके से आवाज उठाएं।
जीवन की असली सफलता दूसरों के काम आने में है
उन्होंने कहा कि जिंदगी एक सफर है और मृत्यु इसका अटल सत्य। हर व्यक्ति को एक दिन इस दुनिया से जाना है। इसलिए जीवन की सफलता को केवल दौलत, बड़े पद या आलीशान जिंदगी से नहीं मापना चाहिए। असली सवाल यह है कि किसी व्यक्ति ने अपने जीवन में समाज, देश और मानवता के लिए क्या योगदान दिया।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने आसपास के जरूरतमंद लोगों की मदद करें, गरीबों के चेहरे पर मुस्कान लाने का प्रयास करें और पीड़ितों को न्याय दिलाने में अपनी भूमिका निभाएं। उनके मुताबिक, किसी की परेशानी दूर करना और किसी जरूरतमंद का सहारा बनना भी समाजसेवा का महत्वपूर्ण रूप है।
अच्छे कर्म ही इंसान को लोगों के दिलों में जिंदा रखते हैं
मोहम्मद जफर बारी अंसारी ने कहा कि इंसान की सांसें थम जाती हैं, लेकिन उसके अच्छे कर्मों की याद लोगों के दिलों में बनी रहती है। इतिहास में उन्हीं लोगों को सम्मान के साथ याद किया जाता है, जिन्होंने अपना जीवन केवल अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों की भलाई के लिए भी जिया।
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि अगर इंसान चाहता है कि उसके जाने के बाद भी लोग उसे अच्छे कामों के लिए याद करें, तो उसे अपने जीवन में समाजहित, देशहित और मानवता की भलाई के लिए योगदान देना चाहिए।
उन्होंने संदेश दिया कि “अगर मरकर भी जिंदा रहना है, तो लिखने लायक कुछ काम कर जाइए या पढ़ने लायक कुछ लिख जाइए।”
मोहम्मद जफर बारी अंसारी उर्फ छोटू मियां के इस संदेश का मुख्य उद्देश्य समाज में प्रेम, भाईचारे, न्याय और इंसानियत की भावना को मजबूत करने की जरूरत पर जोर देना है।
रिपोर्ट : विश्वनाथ आनंद.
